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तिब्बती राष्ट्रीय जनक्रांति दिवस की 52 वीं वर्षगांठ पर कशग का बयान।

March 10, 2011

चीनी शासन के खिलाफ 1959 में तिब्बत में हुई जनक्रांति की आज 52वीं वर्षगांठ है और साल 2008 में समूचे तिब्बत में हुए शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शनों की तीसरी वर्षगांठ है। इस विशोष अवसर पर कशग उन सभी शहीदों को श्रद्धाजलि देता है जिन्होंने तिब्बत के आंदोलन के लिए अपनी जान दे दी। जो लोग सभी भी पीडित है, खासकर उन तिब्बती बुद्धिजीवियों जैसे लेखकों, कवियों , संगीतकारों और पर्यावरणाविदों के प्रति हम अपनी एकता प्रकट करते है, जिन्हें हाल के वर्षो में गिरफ्तार किया गया और बंदी बनाया गया है। हम उनके साहस और विश्वास की दाद देते है। पिछले नौ वर्षों में साल 2002 से 2010 के दौरान 12 वें और 13 वें कशग ने 10 मार्च की वर्षगांठ को उस सबसे महत्वपूर्ण अवसर के रुप में लिया है जिसमें तिब्बत के भीतर और बाहर रहने वाले तिब्बतियों को तिब्बती राजनीति और प्रशासन से जुडे मसलों के बारे में जानकारी दी जा सकती है। कशग ने तिब्बतियों को विकास , नितियों , कार्य योजनाओं, सिद्धांतों और तिब्बत के मसले एंव उसके इतिहास , तिब्बती जनता की ताकत और कमजोरी , अवसर एंव जोखिम , उपलब्धियों एंव विफलताओं , चीन -तिब्बत वार्ता की स्थिति औऱ तिब्बत की आंतरिक स्थिति के बारे में पारदर्शी तरीके से जानकारी दी है। खासकर, सल 2009 में हम सबकेनिर्वासन की 50वीं वर्षगांठ पर कशग ने परमपावन दलाई लामा की असाधारण उपलब्धियों और तिब्बत के भीतर एंव बाहर रहने वाली तिब्बत जनता की महान उपलब्धियों का गुणगान किया औऱ उनको धन्यवाद दिया। यह मौजूदा कशग का 10 मार्च का अंतिम बयान है, इसलिए हम इस अवसर पर आम जनता के प्रति आभार प्रकट रहना चाहते है और कुछ मसलों को याद करना चाहते है। जैसा कि हमने 10 मार्च ,2009 ने अपने बयान में उल्लेख किया था, आधी शताब्दी से भी ज्यादा समय से तिब्बत में विभिन्न तरीकों और नाम पर दमन की श्रृंखला चलाई जा रही है ताकि तिब्बती जनता और संस्कृति को मिटा दिया जाए। इससे तिब्बत विनाश के कगार पर खडा है ।

हालांकि , तिब्बती जनता की एकता और भाईचारे को कमजोर नहीं किया जा सका है, जिसकी वजह से एक पीढी से दूसरा पीढी तक अपने संघर्ष को बनाए रख सकते है। इसके अलावा पूरी दुनिया में दलाई लामा को मिली असाधारण उपलब्धियों की वजह से तिब्बती बौद्ध धर्म, संस्कृति , परंपरा और मूल्यों को नए सिरे से पहचान मिली है और इनमें लोगों की रुचि बढी है । इसके परिणामस्वरुप पूरब एंव पशिचम ,दोनों तरफ तिब्बत समर्थकों और तिब्बती बौद्ध धर्म एंव संस्कृति के अनुयायियों की संख्या कई गुना बढी है। बाद में कंग्यूर एंव तेंग्यूर को कई पशिचमी भाषाओं में भी अनुवाद करने के प्रयास शुरु हुए है और जिस तेजी से तिब्बत बौद्ध धर्म एंव विज्ञान के बीच संपर्क एंव संवाद हो रहा है वह भारी गौरव की बात है और सकारात्मक बदलावों को दर्शाता है ।

राजनीतिक परिस्थिति में किसी ठोस बदलाव के बावजूद तथ्य यह है कि तिब्बति धर्म, संस्कृति और पंरम्परा भविष्य के लिए महान संभावनाओं का मार्ग प्रशस्त कर रही है। जब भविष्य की पीढियां हमारे समय की ओर देखेंगी तो वे हमारे मौजूदा काल को तिब्बती संस्कृति के विस्तार एंव प्रसार के युग के रुप में मानेंगी। इसके अलावा तिब्बती जनता का अहिंसक संघर्ष और तिब्बती राजव्यवस्था की प्रकृति का एक लोकतांत्रिक प्रणाली के रुप में बदलना ऐसी दो उपलब्धियां है जो तिब्बती जनता के गौरव और ताकत का स्रोत है। इसका परिणाम यह हुआ है कि तिब्बत का मसला दुनिया भर में जगह बनाए हुए है यही वजह है जिससे चीन जनवादी गणतंत्र तिब्बत के मसले को नजरअंदाज करने में सक्षम नहीं हो पा रहा। तिब्बतियों ने यह जो चमत्कार कर दिखाया है वह परमपावन 14 वें दलाई लामा की भारी उपलब्धियों की वजह से है। हम उनके प्रति गहरा आभार प्रकट करते है। तिब्बत पर चीन जनवादी गणराज्य के कब्जे के बाद तिब्बती जनता शांति और आनंद का एक क्षण भी नहीं पा सकती है। इसके अलावा , वहां ऐसी नितियां लागू की जा रही है जिनका लक्ष्य न केवल तिब्बती धर्म, संस्कृति एंव प्राकृतिक संसाधनोंको नष्ट करना है, बल्कि तिब्बती पहचान का नामो – निशन मिटा देना है। साल 2008 से ही समूचे तिब्बत में दमन और गहरा हो गया जिसकी वजह से तिब्बती जनता लगातार भय और आशंका के माहौल में मुरझा रही है। तिब्बती बुद्धिजीवियों , विद्धानों , लेखकों, कलाकारों और पर्यावरणविदों को लक्ष्य बनाकर शुरु किए गए हालिया अभियान में उन पर मनगढंत आरोप लगाकर उनको जबरन बंदी बनाया जा रहा है। इससे फिर इस बात की पुष्टि होती है कि तिब्बती पहचान एंव विरासत के समूल नाश के लिए एक निशिचत लक्ष्य बनाकर काम किया जा रहा है ।

इससे फिर इस बात की पुष्टि होती है कि तिब्बती पहचान एंव विरासत के समूल नाश के लिए एक निशिचत लक्ष्य बनाकर काम किया जा रहा है। तिब्बती भाषा तिब्बतियों की पहचान एंव संस्कृति का आधार है, लेकिन स्कूलों में पढाई के मुख्य माध्यम के रुप में धीरे -धीरे तिब्बती भाषा को हटाने से भी इस पहलू पर रोशनी पडती है कि तिब्बती पहचान को नष्ट करने की रणनीति पर काम चल रहा है। ऐसी परिस्थितियों में तिब्बत की जनता अपने जान को जोखिम में डालकर तिब्बती भाषा एंव संस्कृति के संरक्षण और उसको बढावा देने के लिए संघर्ष कर रही है। इसके लिए हम उनके प्रति हार्दिक कृतज्ञता व्यक्त करते है। तिब्बती एंव चीनी जनता पडोसी है और उनके गहरे सामाजिक , आर्थिक औऱ वाणिज्यिक संबंध है। लेकिन यदि कम्युनिस्ट नेताओं की वजह से इन दोनों जनता के बीच शत्रुता बढी और संबंधों में तनाव आया तो यह बेहद अवांछनीय स्थिति होगी। निर्वासन में रहने वाले तिब्बती चीनी जनता के साथ अच्छे संबंध बनाए रखने के लिए अपना सर्वेत्तम प्रयास कर रहे है। कशग तिब्बत के भीतर रहने वाले लोगों के साथ दोस्ताना संबंध बनाए रखें ।

खासकर , हम तिब्बतियों से यह अनुरोध करना चाहते है कि दूसरी राष्ट्रीयताओं के प्रति किसी भी तरह कि हिंसक गतिविधयों में शामिल न हों । मध्यपूर्व और उत्तर अफ्रीका में लोकतंत्र एंव आजादी हासिल करने के लिए हाल में हुए कई शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन हमारे लिए प्रेरणास्रोत है ।

हम उन सबके प्रति भाईचारा दर्शते है जिन्होंने इन प्रदर्शनों में हिस्सा लिया और तब तक ऐसे लोगों का समर्थन करते रहेंगे और उनके साथ खडे रहेंगे , जब तक उनकी कार्रवाई अहिंसक रहती है। इन घटनाओं से यह तथ्य साबित होता है कि कहीं भी एकाधिकारवादी शासन के दमन को ज्यादा समय तक नहीं कायम रखा जा सकता ।

मौजूदा समय में तिब्बत के भीतर एंव बाहर रहने वाले तिब्बतियों के लिए एक बडी चिंता यह है कि परम पावन दलाई लामा तिब्बती जनता के राजनीतिक नेतृत्व की भूमिका से अलग हो रहे है और उन्होंने अपनी राजनीतिक एंव प्रशासनिक जिम्मेदारी चुने हुए नेताओं को सौंपने की घोषणा की है। इस घोषणा के बाद बडी संख्या में विभिन्न बस्तियों में रहने वाले निर्वासित तिब्बती , संगठन ,मठों से जुडे संगठन , व्यक्ति और खासकर तिब्बत के भीतर रहने वाले बहुत से तिब्बती सामूहिक रुप से एंव व्यक्तिगत तौर पर प्रबलता से परमपावन दलाई लामा से यह अनुयय- विनय कर रहे है कि वे ऐसा कदम न उठाएं ।

कशग भी प्रबलता से यही अनुरोध करता है । दलाई लामा की संस्था को अवलोकितेश्वर का अवतार माना जाता है और अविलोकितेश्वर के आध्यात्मिक क्षेत्र बर्फ भूमि के निवासी उनसे एक विशुद्ध कर्म के बंधन से बंधे हुए है। इसलिए तिब्बती जनता को यह सुनिशिचत करने के लिए हर संभव प्रयास करना चाहिए कि यह रिश्ता बिना किसी बदलाव के हमेशा के लिए बना रहे । तिब्बती जनता को गंभीर प्रयास करने चाहिए कि आगे आने वाले दालाई लामाओं और तिब्बत के बीच यह बंधन कायम रहे। ऐसा हो, इसके लिए हम तिब्बती जनता से अनुरोध करते है कि अपने सामूहिक गुणों को बढाने के लिए और प्रयास करें।

लौकिक जिम्मेदारियों से मुक्त होने की अपनी इच्छा को पूरा करने के लिए परमपावन निर्वासित तिब्बती संसद के आगामी सत्र को एक संदेश जारी करेंगे औऱ भविष्य के सभी कदम इस बात पर निर्भर करेंगे कि विधायी सदन के सदस्य इसके बारे में कितनी बुद्धिमत्ता से कानून बनाते है। कशग निर्वासित संसद के सदस्यों से यह अनुरोध करता है कि इसे सबसे महत्वपूर्ण मसला मानते हुए विचार करें और इसके हिसाब से सही रास्ते पर जाने के लिए सावधानीपूर्वक सोचे। हांलाकि ,पिछले करीब 10 साल में 12 वें और 13 वें कशग के कार्य़काल के दौरान कोई बडी उपलब्धि हासिल नहीं की जा सकी है , लेकिन हम अपना कार्यकाल बिनाकिसी बडी विफलता और विवाद के भी पूरा कर सके है। यह परमपावन दलाई लामा के मार्गदर्शन , केंद्रीय तिब्बती प्रशसन के अधिकारियों की कठोर मेहनत औऱ हम जनता के सहयोग एंव समर्थन की वजह से ही हासिल हो सका है। मैं और कशग के मेरे सभी सदस्य परमपावन दलाई लामा का हार्दिक धन्यवाद देते है और उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते है । इसी प्रकार यदि हम अपने कार्य़कल के दौरान आपकी दृष्टि के हिसाब से कुछ कार्य़ कर पाने में सक्षम न रहे हो तो उसके लिए भी गंभीर क्षमाप्रार्थि है। हम परमपावन से अनुरोध करते है कि वे तब तक हमारा नेतृत्व करते रहें, जब तक हमें आजादी नहीं मिल जाती । इसी प्रकार हम तिब्बत के भीतर और बाहर रहने वाली जनता का भी उनके द्वारा लगातार मिल रहे सहयोग और समर्थन के लिए हार्दिक आभार प्रकट करते है।
हम केंद्रीय तिब्बती प्रशासन के सभी अधिकारियों को भी उदारता से धन्यवाद देते है जिन्होंने अपर्याप्त वेतन औऱ सुविधाओं के बावजूद केवल तिब्बत आंदोलन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता की वजह से ही निर्वासित तिब्बती प्रशासन के लिए गंभीरता औऱ समर्पण से काम किया है।

इस अवसर पर हम सभी तिब्बत समर्थक समूहों , दुनिया भर की सरकारों और संसद सदस्यों को धन्यवाद देना और कृतज्ञता व्यक्त करना चाहते है जिन्होंने तिब्बती जनता के संघर्ष में साथ दिया है और खासकर भारत की आम जनता और यहां की केद्र एंव राज्य सरकारों के प्रति धन्यवाद एंव कृतज्ञता व्यक्त करना चाहते है जिन्होने तिब्बतियों के कल्याण , तिब्बती संस्कृति एंव आध्यात्मिक विरासत को बढावा देने और तिब्बती जनता की आकांक्षाओं को पूरा करने में दृढता से सहयोग दिया है।अंत में, कशग प्रार्थना करता है कि परमपावन दलाई लामा दीर्घायु हो और उनकी सभी इच्छाएं लगातार पूरी होती रहें। तिब्बत मसले का सच जल्दी ही प्रबल हो।
कशग
10 मार्च , 2011
( नोट । यह बयान अनुदित किया गया है, किसी भी तरह की अस्पष्टता पर कृपया तिब्बती भाषा में जारी मूल बयान को अंतिम और आधिकारिक माना जाए)


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