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तिब्बत समस्या के हल को लेकर भारत पर टिकी निगाहें : दावा छेरिंग

February 8, 2013

दैनिक ट्रिब्यून, 7 फ़रवरी 2013

धर्मशाला, 7 फरवरी। निर्वासित तिब्बतियों को अब भारत सरकार व भारतीयों पर तिब्बत समस्या के हल की उम्मीद टिकी है। तिब्बती सरकार की संसदीय समिति के अध्यक्ष दावा छेरिंग ने धर्मशाला में पत्रकार वार्ता को सम्बोधित करते हुए कहा कि 1959 में चीन द्वारा सताए गए तिब्बतियों को भारत ने शरण दी और उन्हें अपनी संस्कृति को बचाए रखने में मदद की। उन्होंने कहा कि अपने शरणदाता पर उन्हें इसलिए भी उम्मीद है क्योंकि भारत ने ही बौद्ध धर्म तिब्बत पंहुचाकर तिब्बतियों का उद्धार किया। इस नाते भारत हमारा गुरु है और चेले हैं। जब चेला मुसीबत हो तो गुरु का धर्म है कि वह उसकी मदद करे।

उन्होंने कहा कि 2009 से अब तक तिब्बत में धर्मगुरु की वापसी और तिब्बत की स्वायतत्ता के लिए 99 तिब्बतियों ने आत्मदाह जैसा कदम उठाया है और इनमें से 80 लोगों की मौत हो गई। बचे हुए अन्य में से अधिकतर चीन की जेलों में अमानवीयता का शिकार हो रहे हैं।

एक सवाल के जबाव में छेरिंग ने कहा कि धर्मगुरु दलाईलामा तथा निर्वासित तिब्बती सरकार ने आत्मदाह के लिए कभी भी किसी को प्रेरित नहीं किया तथा वह इसका विरोध करते हैं। पंरतु तिब्बत से बाहर रहते हुए वह इन लोगों को रोक भी नहीं सकते। उन्होंने कहा कि तिब्बत समस्या का हल बातचीत से निकलेगा और निर्वासित सरकार किसी भी समय किसी भी जगह चीन से बातचीत के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि 2009 से अब तक बीजिंग और धर्मशाला के बीच अधिकारिक तौर पर कोई सम्पर्क नहीं है पंरतु अनधिकृत तौर पर उनके साथ सम्पर्क बना हुआ है।

तिब्बती सांसदों के तीन विभिन्न दलों ने पिछले दिनों भारत के विभिन्न प्रांतों का दौरा कर तिब्बती समस्या के हल के लिए समर्थन जुटाने के लिए प्रयास किए हैं, जिनमें वह काफी हद तक सफल हुए हैं। उन्होंने कहा कि भारत वर्ष के विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों सहित अन्य दलों के नेताओं ने तिब्बत समस्या को लेकर अपना पूर्ण समर्थन देने का खुलकर समर्थन किया है।

उन्होंने कहा कि उत्तरप्रदेश के समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता शिवपाल यादव ने तो यहां तक कह दिया कि वह चीनी सामान का तब तक बहिष्कार करेंगे, जब तक तिब्बत को स्वायतत्ता नहीं मिलती। वहीं जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अबदुल्ला और उनके पिता फारूक अबदुल्ला और दादा शेख अबदुल्ला ने हमेशा तिब्बतियों का खुलकर समर्थन किया है।

यह परिवार हमेशा तिब्बती स्वायतत्ता का पक्षधर रहा है। उन्होंने कहा कि दिल्ली के जंतर-मंतर में चल रहे तिब्बती एकजुटता अभियान को पूर्ण समर्थन मिल रहा है। भारत सहित नेपाल और भूटान में रह रहे निर्वासित तिब्बतियों ने यहां बड़ी संख्या में पंहुचकर इस अभियान को अपना जोरदार समर्थन किया है। इस मौके पर तिब्बती सांसदों में केलसंग डेमदुल, गांग लाहमो, मुगरू तेनपा, यीशे डोलमा, थुपतन लुंगरिक और तेंजिन भी उपस्थित थे।


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