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प्रेस विज्ञप्ति : सीटीए ने ति‍ब्‍बती संसद की विदेश मामलों की समिति (एचएफएसी) द्वारा ‘रिज़ॉल्व तिब्बत बिल’ की मंजूरी का स्वागत किया

November 29, 2023

tibet.net

धर्मशाला। केंद्रीय तिब्बती प्रशासन (सीटीए) ने ति‍ब्‍बती संसद की विदेश मामलों की समिति (एचएफएसी) द्वारा तिब्बत-चीन संघर्ष अधिनियम के प्रस्ताव को बढ़ावा देने वाले तिब्बत बिल एच.आर.- ५३३ की मंजूरी का स्वागत किया है। एचएफएसी ने २९ नवंबर २०२३ को मुद्दे को आगे बढ़ाते हुए मतदान में सर्वसम्मति से दोनों दलों की सहमति वाले इस ‘तिब्बत-चीन संघर्ष के समाधान को बढ़ावा देनेवाले अधिनियम’ को पारित कर दिया। इस कानून को तिब्बत समाधान अधिनियम रूप में भी जाना जाता है।

एचएफएसी द्वारा अनुमोदित यह विधेयक इससे पहले अमेरिका के ओरेगन राज्‍य से डेमोक्रेट सीनेटर जेफ मर्कले और इंडियाना राज्‍य से रिपब्लिकन सीनेटर टॉड यंग के साथ-साथ प्रतिनिधि सभा में मैसाच्‍यूसेस्‍ट्स राज्‍य से डेमोक्रेट सदस्‍य जिम मैकगवर्न और टेक्सास से रिपब्लिकन सदस्‍य माइकल मैककॉल द्वारा पेश किए गए कानून का सदन से संशोधित संस्करण है। यह विधेयक तिब्बत-चीन संघर्ष को हल करने के लिए पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना और परम पावन दलाई लामा के प्रतिनिधियों या तिब्बती लोगों के लोकतांत्रिक रूप से चुने गए नेताओं के बीच बिना किसी पूर्व शर्त के सीधी बातचीत का समर्थन करने की अमेरिकी आधिकारिक नीति को ही दोहराता है।

२००२ से २०१० के बीच तक चीन और परम पावन के प्रतिनिधियों के बीच नौ दौर की बातचीत के बाद चीन ने बातचीत को रोक दिया। चीन ने इसकी जगह तिब्बत में तिब्बती भाषा, धर्म, संस्कृति और जीवन शैली को नष्ट करने के लिए औपनिवेशिक नीतियों और कार्यक्रमों की एक शृंखला की शुरुआत कर दी, जो तिब्बती लोगों की पहचान और अस्तित्व को खतरे में डाल रही है।

यह विधेयक पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना (पीआरसी) के तिब्बत के प्राचीन काल से चीन का हिस्सा होने के दावे को ऐतिहासिक रूप से गलत बताकर खारिज करता है और विदेश विभाग को तिब्बत के इतिहास, संस्कृति और परम पावन दलाई लामा संस्‍था सहित तिब्बत की अन्‍य संस्थाओं के बारे में चीन की दुष्प्रचार का सक्रिय रूप से मुकाबला करने का अधिकार देता है।

‘रिज़ॉल्व तिब्बत ऐक्ट’ को आगे बढ़ाने के प्रयास में सिक्योंग पेन्पा छेरिंग ने इस साल १६ से २० अक्तूबर तक वाशिंगटन- डीसी का दौरा किया और उन्होंने ११८वीं अमेरिकी कांग्रेस से तिब्बत बिल के पारित होने की विशेष उम्मीदें व्यक्त कीं। सिक्योंग कहते हैं, ‘पीआरसी का चीन का अंग बताते हुए तिब्बत पर दावा करना काल्पनिक है, क्योंकि इसमें कोई ऐतिहासिक सच्चाई नहीं है। पीआरसी सरकार के तहत कई दशकों में हम तिब्बतियों को भारी नुकसान उठाना पड़ा है, फिर भी हमने हमेशा अहिंसक और शांतिपूर्ण बातचीत के माध्यम से अपने मतभेदों को सुलझाने की कोशिश की है।

सिक्योंग ने आगे कहा, ‘यह विधेयक अमेरिका को अपने देश में तिब्बतियों को समर्थन देते हुए अधिक ताकत और तात्कालिकता के साथ बातचीत को जरूरी बताते हुए आह्वान करने की अनुमति देगा। इससे न केवल तिब्बतियों के हित को मदद मिलेगी, बल्कि दुनिया भर में लोकतंत्र, संवाद और शांति के हित को भी आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी। इसलिए, हमें विश्वास है कि यह विधेयक कांग्रेस के दोनों सदनों से पारित होने के बाद राष्ट्रपति का अनुमोदन भी प्राप्‍त कर लेगा।‘

‘हम तिब्बत बिल को मंजूरी देने के लिए एचएफएसी के अध्यक्ष माइकल मैककॉल, रैंकिंग सदस्य ग्रेगरी मीक्स और समिति के सभी सदस्यों को धन्यवाद देते हैं। यह मंजूरी उस अविश्वसनीय द्विदलीय समर्थन के बल पर मिली है जो अमेरिका ने हमेशा हमारे उचित कारण के लिए दिखाया है।‘


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