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यूरोपीय संघ : चीन में मानवाधिकार संकट को सर्वोच्च प्राथमिकता

April 5, 2019

savetibet.org, 4 अप्रैल, 2019

यूरोपीय संघ : चीन में मानवअधिकारों के उल्लंघन को सर्वोच्च प्राथमिकता पर रखा

सार्वजनिक रूप से शिनजियांग के कैदी को बलपूर्वक उठाने को मुद्दा बनाया

मानवाधिकारों की निगरानी करनेवाली संस्था ‘एमनेस्टी इंटरनेशनल’, ‘इंटरनेशनल फेडरेशन फॉर ह्यूमन राइट्स’, इंटरनेशनल कंपेन फॉर तिब्बत और इंटरनेशन सर्विस फॉर ह्यूमन राइट्स सेवा की संयुक्त प्रेस विज्ञप्ति

ब्रसेल्स, 4 अप्रैल, 2019

पांच मानवाधिकार समूहों ने आज 4 अप्रैल को कहा कि यूरोपीय संघ के नेताओं को 9 अप्रैल, 2019 को ब्रसेल्स में यूरोपीय संघ-चीन शिखर सम्मेलन के दौरान चीन में बिगड़ते मानवअधिकारों की स्थिति को सुधारने को लेकर चीनी नेताओं पर दबाव डालना चाहिए। उन्हें 1-2 अप्रैल को यूरोपीय संघ-चीन मानवाधिकार वार्ता के दौरान उठाई गई चिंताओं को आगे बढ़ाना चाहिए और चीनी अधिकारियों से शिनजियांग  में ‘राजनीतिक शिक्षा’ शिविरों को बंद करने और आंदोलनकारी कैदियों को मुक्त करने का आह्वान करना चाहिए।

शिखर सम्मेलन होने तक के सप्ताहों में यूरोपीय संघ और सदस्य देशों के नेताओं को चीनी नेताओं के साथ बैठने के कई अवसर मिले हैं, जिनमें वे मानवाधिकारों के मुद्दों को उठा सकते थे। लेकिन अब तक यूरोपीय संघ के उच्च प्रतिनिधि फेडेरिका मोगेरिनी और बाद में फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रोन, जर्मन चांसलर एंजेला मर्केल और यूरोपीय संघ आयोग के अध्यक्ष जीन-क्लाउड जुनकर, सभी चीन में बढ़ते मानवअधिकारों के उल्लंघन के लिए सार्वजनिक रूप से इसका उल्लेख करने या अपील करने में विफल रहे हैं।

यूरोपीय संघ के मानवाधिकार निगरानी संस्था के अभियान निदेशक लोटे लेच ने कहा, यूरोपीय संघ और उसके सदस्य देशों ने सार्वजनिक रूप से ‘अपना पूरा भार’ मानवाधिकार कार्यकर्ताओं पर डाल दिया है और चीन में तेजी से बिगड़ रहे मानवअधिकारों के माहौल के बीच उस वादे का निर्ममता से परीक्षण किया जा रहा है। यूरोपीय संघ के लिए यूरोपीय संघ- चीन शिखर सम्मेलन चीनी नेतृत्व को मानवअधिकारों पर मजबूत सार्वजनिक संदेश भेजने का एक महत्वपूर्ण अवसर है।

इन मानवाधिकारवादी समूहों ने 13 मार्च को यूरोपीय संघ के नेताओं और सदस्य देशों के विदेश मंत्रियों को लिखे एक पत्र में चीन में मानवाधिकारों के गंभीर उल्लंघन का विवरण दिया है, जिसमें तुर्क मुसलमानों को सामूहिक तौर पर हिरासत में रखना और उनकी निगरानी, तिब्बत में सघन राजनीतिक शिक्षा और उत्पीड़न, बलपूर्वक लोगों को गायब कर देना, शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करनेवाले कार्यकर्ताओं, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और उनके पक्ष में खड़ा होनेवाले वकीलों को जेल में डाल देना शामिल है।

समूहों ने दुनिया भर में मानवाधिकारों के लिए चीन के बढ़ते खतरे को भी संबोधित किया। इनमें अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार कानून को कमजोर करने के साथ संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद जैसी संस्थानों को कमजोर करने के प्रयास शामिल हैं। मौलिक अधि‍कारों की पर्याप्त सुरक्षा के बिना चीन के बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव का तेजी से विस्तार और चीन द्वारा दुनिया की सरकारों पर शरण चाहने वालों और अन्य लोगों की जबरन वापसी करने का जबर्दस्त दबाव के गंभीर खतरे हैं। दुनिया भर के मानवअधिकारों पर इसका भी भारी प्रभाव पड़ रहा है।

1-2 अप्रैल को यूरोपीय संघ ने चीन-यूरोपीय संघ मानवाधिकार वार्ता के 37वें दौर की मेजबानी की। ईयू एक्सटर्नल एक्शन सर्विस (ईईएएस) द्वारा सैद्धांतिक प्रयासों के बावजूद संवाद एक कमजोर राजनयिक उपकरण बना हुआ है। चीनी शासन यूरोपीय संघ द्वारा उठाए गए मानवाधिकार मुद्दों पर ठोस प्रगति का प्रदर्शन करने में लगातार विफल रहा है। लगातार दूसरे वर्ष चीनी अधिकारियों ने पत्र पर हस्ताक्षर करने वाले समूहों समेत कई स्वतंत्र नागरिक समाज संगठनों से मिलने से इनकार कर दिया। एक दशक से अधिक समय से यूरोपीय संघ के अधिकारी जोर देते रहे हैं कि चीनी अधिकारियों के साथ मानवाधिकारों पर चर्चा करने एकमात्र निश्चित मौका मानवाधिकार वार्ता थी जो ‘कुछ नहीं से बेहतर थी’। इसके बजाय, यह संवाद चीनी नेताओं के लिए मानवाधिकार मुद्दों और इसपर आलोचनाओं का सामना करने और यूरोपीय संघ के नेताओं के सामने आकर इसपर सीधे और उच्च स्तरीय चर्चा करने के बजाये इन मुद्दों को दबाने का एक जरिया बन गया है।

1 अप्रैल के मानवाधिकार संवाद के बाद जारी की गई यूरोपीय संघ की प्रेस विज्ञप्ति में ईईएएस द्वारा व्यक्तिगत मामलों को उठाने के महत्वपूर्ण प्रयासों पर प्रकाश डाला गया और कहा गया कि चीन ने बातचीत के पूर्ण एजेंडे में भाग नहीं लिया। उसने यूरोपीय संघ द्वारा वर्णित सभ्य समाज के साथ ‘विचारों के सार्थक आदान-प्रदान’ में भाग लेने से इनकार कर दिया।

पिछले यूरोपीय संघ-चीन सम्मेलनों में यूरोपीय संघ के शीर्ष नेतृत्व ने तात्कालि‍क मानवाधिकारवादी मुद्दों पर बहुत ही कम मुंह खोला है। नागरिक समाज के संगठनों ने यूरोपीय संघ की परिषद और आयोग के अध्यक्षों से आग्रह किया कि वे यूरोपीय संघ के संकल्पों को पूरी तरह से पूरा करें और 9 अप्रैल के शिखर सम्मेलन का उपयोग बातचीत में उठाए गए मानवाधिकारों की चिंताओं को सार्वजनिक रूप से उठाने में करें और चीन पर कार्यकर्ताओं और वकीलों की रिहाई सहित ठोस कार्रवाई के लिए दबाव डालें।

अधिकार समूहों ने यूरोपीय संघ के नेताओं से आग्रह किया कि वे झिंझियांग पर एक स्वतंत्र और अंतर्राष्ट्रीय तथ्यान्वेषी मिशन को अनुमति देने, राजनीतिक कैदियों को रिहा करने और नागरिक और राजनीतिक अधिकारों पर अंतर्राष्ट्रीय अनुबंधों की पुष्टि करने का दबाव चीन सरकार पर डालें। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार के उच्चतम स्तरों पर यूरोपीय संघ और उसके सदस्य देशों को 1989 के चीन के तियानमेन चौक पर लोकतंत्र समर्थक प्रदर्शनकारियों पर की गई बर्बर कार्रवाई की 30वीं वर्षगांठ मनाना चाहिए।

मानवाधिकारों के लिए अंतर्राष्ट्रीय सेवा के निदेशक फिल लिंच ने कहा, ‘यूरोपीय संघ के नेताओं को हुआंग क्यूई, वांग क्वानझांग, ताशी वांगचुक और इल्हाम तोहती जैसे साहसी कार्यकर्ताओं से प्रेरित होना चाहिए और चीनी नेताओं के साथ बैठक के दौरान उनकी रिहाई के लिए अपील करनी चाहिए। ‘ऐसा करने में विफल होना जेलों में बंद इन बहादुर मानवाधिकार रक्षकों के साथ विश्वासघात होगा।‘

पत्र पर हस्ताक्षर करनेवाले संगठनों में- एमनेस्टी इंटरनेशनल, ह्यूमन राइट्स वॉच, द इंटरनेशनल कंपेन फॉर तिब्बत, द इंटरनेशनल फेडरेशन फॉर ह्यूमन राइट्स और इंटरनेशनल सर्विस फॉर ह्यूमन राइट्स शामिल हैं।

एमनेस्टी इंटरनेशनल के पूर्वी एशिया शोध निदेशक रोसेन राईफ ने कहा, ‘यूरोपीय संघ के नेताओं को यह समझना चाहिए कि उनकी शांत कूटनीति ने चीन में मानवाधिकारों की स्थिति को कम से कमतर किया है। उन्हें अधिकारों में सुधार की मांग और चिंताओं को जोरदार ढंग से प्रकट करने की आवश्यकता है।‘


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