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शून्य आत्मसात करने से बोधिसत्व की प्राप्ति

January 16, 2011

वाराणसी। प्रज्ञा में समस्त पदार्थ एक-दूसरे के सापेक्ष हैं और उनकी वास्तविकता शून्य। इस शून्य को आत्मसात करने के बाद चार काय से युक्त बोधिसत्व की प्राप्ति होती है। यह संदेश दिया परम पावन दलाई लामा ने। बौद्ध धर्मगुरु केंद्रीय तिब्बती अध्ययन विश्वविद्यालय के कालचक्र मैदान में बोधिचर्चावतार व भावनाक्रम ग्रंथों पर आयोजित व्याख्यान माला को पांचवे व अंतिम दिन संबोधित कर रहे थे। कहा बोधिचर्चावतार महापानी ग्रंथ के अध्ययन और उसके आचरण से समस्त का कल्याण होता है।

परम पावन ने कहा कि बोधिसत्व प्रार्थना करता है कि जब तक आकाश व धरती रहें तब तक मैं जगत का दुख नाश करते हुए संसार में बना रहूं। जगत का जो दुख है उसे मैं भोगूं और बोधिसत्व के सभी पुण्यों से संपूर्ण जगत सुखी रहे।

उन्होंने सुबह सवा आठ बजे आर्य तारा चिंतामणि की दीर्घायु अभिषेक पूजा शुरू कराते हुए प्रवचन स्थल की सीमाओं को मंत्रों से बांधकर शुद्ध किया। फिर कहा यदि कोई व्यक्ति गलत आचरण करते हुए लंबी आयु जीता है, तो उसका कोई महत्व नहीं है। यदि कोई व्यक्ति किसी को नुकसान पहुंचाए बिना जीता है, तभी ठीक है। संसार हित के लिए दीर्घायु होना पूजनीय है। दीर्घायु मंत्र जप के लिए मन का शुद्ध होना जरूरी है।

परम पावन ने अनुयायियों को श्वेत तारा के रूप में ध्यान करने का निर्देश दिया और दीर्घायु पूजा कराई। इस दौरान ंउन्हें मूर्ति, ग्रंथ और स्तूप का प्रतीक भेंट किया। दलाई लामा ने कहा कि यह पूजा लोक कल्याण के लिए की जाती है। इससे दीर्घायु प्राप्त होती है, जिसका सदुपयोग लोक कल्याण के लिए करना चाहिए। इसका महत्व इसलिए भी है कि इसको करने से बल व पुण्य की वृद्धि होती है। आर्य तारा दीर्घायु अभिषेक पूजा बौद्ध परंपरा की महत्वपूर्ण पूजा है।

बिना वीजा पहुंचे दो हजार तिब्बती

वाराणसी। परमपावन दलाई लामा का संदेश ग्रहण करने की लालसा से बगैर वीजा के दो हजार तिब्बती श्रद्धालु रविवार को सारनाथ पहुंचे। इन श्रद्धालुओं को दोपहर सवा एक बजे दलाईलामा ने संबोधित भी किया। हालांकि इस आयोजन से मीडिया को दूर ही रखा गया था। इस बारे में सुरक्षा प्रभारी ने मजबूरी जताई कि आयोजन की खबर व तस्वीर समाचारपत्रों व टीवी पर प्रसारित होने पर तिब्बत से आए लोगों को चीन सरकार दंडित करेगी। यह दीगर बात है कि दलाई लामा के पांच दिवसीय कार्यक्रम का कवरेज कालचक्र मैदान से चीनी, रुसी, इटैलियन, मंगोलियन, हिंदी व अंग्रेजी में अनुवाद करने के साथ इंटरनेट पर भी जारी किया जा रहा है। बिना वीजा के यहां पहुंचे तिब्बतियों की देश की सीमा पर पड़ताल की गई या नहीं, अब ये लौटेंगे अथवा यहीं रह जाएंगे यह लोगों के बीच चर्चा का विषय बना है।

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