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सिक्योंग पेन्पा ने एस्टोनियाई संसद में ‘तिब्बत की वैधानिक स्थिति’ पर सुनवाई में भाग लिया

January 26, 2024

tibet.net

एस्टोनिया। तिब्बती स्वतंत्रता आंदोलन के लिए एक महत्वपूर्ण क्षण उस समय आया जब, २५ जनवरी २०२४ को एस्टोनियाई संसद में ‘तिब्बत की वैधानिक स्थिति’ को लेकर सुनवाई हुई। इसकी अध्यक्षता पार्लियामेंटरी सपोर्ट ग्रुप फॉर तिब्बत के अध्यक्ष और विदेश मंत्रालय संबंधित आयोग का सदस्य सांसद जुकू-काले रेड ने की। सिक्योंग पेन्पा छेरिंग को सुनने के लिए ३५ सांसद, पत्रकार, शिक्षाविद, लंदन स्थित तिब्बत कार्यालय से प्रतिनिधि सोनम फ्रैसी, प्रोफेसर होन-शियांग लाउ, डॉ. माइकल वान वॉल्ट वान प्राग और तिब्बत समर्थक उपस्थित थे।

अध्यक्ष सांसद जुकु-काले रेड ने तिब्बत मुद्दे की पृष्ठभूमि और घटना के महत्व के बारे में बताते हुए सुनवाई शुरू की। सुनवाई में सबसे पहले माननीय सिक्योंग का बयान हुआ। उन्होंने पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना (पीआरसी) द्वारा आक्रमण से पहले स्वतंत्र तिब्बत की पूरी कहानी, मध्यम-मार्ग दृष्टिकोण और तिब्बत के ऐतिहासिक तथ्यों को सही करने के महत्व को ऐतिहासिक संदर्भ देकर समझाया।

इसके बाद प्रोफेसर लाउ ने चीनी शाही अभिलेखों से लेकर प्रमाण दिया, जिससे बिना किसी संदेह के साबित होता है कि चीनी मिंग और किंग राजवंशों ने कभी भी तिब्बत को चीन के हिस्से के रूप में दर्ज नहीं किया। ये चीनी राजवंश के रिकॉर्ड से निर्विवाद और सच्‍चाई से यह साबित करते हैं कि तिब्बत प्राचीन काल से कभी भी चीन का हिस्सा नहीं रहा है। डॉ. माइकल वैन वॉल्ट वैन प्राग ने अपनी प्रस्तुति में इस तथ्‍य को कानूनी दृष्टिकोण से और भी मजबूत किया। इसमें बताया गया कि चीन तिब्बत पर अपने कब्जे की वैधता क्यों चाहता है। चीन द्वारा तिब्बती लोगों को आत्मनिर्णय के अधिकार से वंचित करने का औचित्य ठहराने के लिए अपने व्यापारिक साझेदार सरकारों पर ‘तिब्बत को चीन का आंतरिक मुद्दा’ घोषित करने का दवाब डाला जा रहा है। यह स्थिति अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन करने वाली है।

इसके बाद प्रतिनिधि सोनम फ्रैसी ने तिब्बत के ऐतिहासिक और पौराणिक अभिलेखों का हवाला देकर चर्चा को सही दिशा में स्‍थापित किया। उन्‍होंने तिब्बत की उत्पत्ति, तिब्बती लोगों और दुनिया में शांति लाने के लिए दलाई लामाओं के बीच पूर्व-नियत संबंधों की व्याख्या के बारे में बात की। उन्होंने तिब्बत में पीआरसी शासन की कठोर उपनिवेशवादी प्रकृति पर भी प्रकाश डाला और बताया कि तिब्बत में शांति बहाल करने के लिए तिब्बती मुक्ति साधना का शांतिपूर्ण और अहिंसक समाधान तैयार करना जरूरी है। इससे शांति और अहिंसक उपायों के प्रति वैश्विक विश्वास बढ़ेगा जिससे दुनिया के कुछ हिस्से में हिंसा के दुष्चक्र को समाप्‍त करने में कारगर साबित होगा।

स्वतंत्र एस्टोनिया के पूर्व प्रथम प्रधानमंत्री माननीय मार्ट लार ने सुनवाई के समर्थन में अपना संदेश भेजा, जिसका वाचन एस्टोनियाई में सांसद जुकु-काले रेड द्वारा और अंग्रेजी में लंबे समय से कट्टर तिब्बत समर्थक रॉय स्ट्राइडर द्वारा किया गया। सुनवाई के बाद संसद में स्वागत समारोह आयोजित किया गया जहां वक्ताओं और दर्शकों को बातचीत के लिए अधिक समय मिला। पार्लियामेंटरी सपोर्ट ग्रुप फॉर तिब्बत के सदस्यों और स्थानीय समर्थकों ने इस समारोह में आए तिब्बती प्रतिनिधिमंडल के सम्मान में रात्रिभोज का आयोजन किया।

माननीय सिक्योंग का २५ जनवरी को हवाई अड्डे पर सांसद जुकु-काले रेड ने स्वागत किया, जिन्होंने आज २६ जनवरी को एस्टोनियाई संसद का व्यक्तिगत दौरा भी किया। इस दौरान उन्होंने रिइगीकोगु के राष्ट्रपति लॉरी हुसार के साथ-साथ विदेश मामलों की समिति के अध्यक्ष से भी मुलाकात की। दो मीडिया संस्‍थानों के संवाददाता सिक्योंग की संसद यात्रा में साथ रहे और रिपोर्ट की। परिणामस्वरूप, एस्टोनियाई मीडिया ने कल इस कार्यक्रम का जोर शोर से कवरेज दिया।


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