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सीटीए का कॉप 25 शुरू- तिब्बत अभियान के लिए जलवायु कार्रवाई

November 6, 2019

धर्मशाला। स्पेन में 2-13 दिसंबर 2019 के दौरान आयोजित होने वाले कॉप-25 संयुक्त राष्ट्र जलवायु शिखर सम्मेलन के मद्देनगर केंद्रीय तिब्बती प्रशासन ने तिब्बत के लिए ‘दूसरी ’जलवायु कार्रवाईः पृथ्वी के तीसरे ध्रुव’ अभियान की शुरुआत की, जिसमें विश्व नेताओं से वैश्विक जलवायु परिवर्तन पर किसी भी चर्चा के लिए तिब्बती पठार और तिब्बत को केंद्रीय मुद्दा बनाने और इसके वैश्विक महत्व को मान्यता देने का आग्रह किया गया।

अभियान का शुभारंभ 6 नवंबर की सुबह एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में केंद्रीय तिब्बती प्रशासन के अध्यक्ष डॉ लोबसांग सांगेय ने किया।

25 लाख वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल के साथ समुद्र तल से 4,000 मीटर से अधिक की औसत ऊंचाई पर अवस्थित तिब्बती पठार पृथ्वी का सबसे ऊंचा और सबसे बड़ा पठार है। 46,000 ग्लेशियरों के साथ तिब्बत उत्तरी ध्रुव और दक्षिणी ध्रुव के बाद बर्फ का तीसरा सबसे बड़ा प्राकृतिक भंडार है और पृथ्वी पर उपलब्ध ताजा पानी का सबसे बड़ा स्रोत है। यह स्थिति तिब्बत को एशिया की छह सबसे बड़ी नदियों (ड्रिचू/यांग्त्ज़ी नदी, माचू/येलो नदी, ज़चू/मेकांग नदी, ग्यालमोन्गुलु/साल्वेन नदी, यारलुंग त्संगंग्पो/ब्रह्मपुत्र नद और सेन्गसंग्पो/सिंधु नदी) का मुख्य स्रोत बनाती हैं। ये नदियां 10 सबसे घनी आबादी वाले देशों (पाकिस्तान, नेपाल, बर्मा, थाईलैंड, लाओस, वियतनाम, कंबोडिया और चीन) से होकर बहती है और लगभग 1.5 अरब लोगों को जीवन प्रदान करती हैं।

दुर्भाग्य से, तिब्बती पठार में हर दस साल में लगभग 0.3 डिग्री सेल्सियस की तापमान वृद्धि देखी गई है। इसका मतलब है कि यहां पिछले 50 वर्षों में तापमान में 1.3 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि हुई है, जो वैश्विक औसत से तीन गुना अधिक है। परिणामस्वरूप 2050 तक तिब्बत के 66 प्रतिशत ग्लेशियरों के 82 प्रतिशत बर्फ पिघलने का खतरा उपस्थित हो गया है। इससे पूरी दुनिया, विशेष रूप से दक्षिण एशिया के लोगों के लिए विनाशकारी परिणाम आनेवाले हैं।

यही कारण है कि नोबेल शांति पुरस्कार विजेता और तिब्बत के पर्यावरण के पैरोकार परमपावन दलाई लामा ने बार-बार जोर देकर कहते रहे हैं कि ‘जलवायु परिवर्तन सिर्फ एक या दो राष्ट्रों की चिंता नहीं है। यह एक ऐसा मुद्दा है जो पूरी मानवता और इस पृथ्वी पर रहने वाले हर व्यक्ति को प्रभावित करता है।‘ उन्होंने कहा कि ‘इसके लिए मानवता की एकता की भावना के आधार पर वैश्विक जिम्मेदारी की बड़ी समझ की आवश्यकता है।‘

इसी तरह तिब्बती लोगों से लोकतांत्रिक रूप से निर्वाचित नेता राष्ट्रपति डॉ लोबसांग सांगेय ने जोर देकर कहा कि वैश्विक जलवायु परिवर्तन की व्यापक समझ के लिए तिब्बती पठार का अध्ययन करने के जरूरत है। उन्होंने यूएनएफसीसीसी ‘तिब्बती पठार के वैश्विक पारिस्थितिक महत्व को पहचानने’ और वैश्विक जलवायु परिवर्तन पर किसी भी चर्चा के लिए तिब्बत को केंद्रीय मुद्दा बनाने का आग्रह किया।‘

इसलिए, तिब्बत के लिए सीटीए की कॉप-25 जलवायु कार्रवाई का उद्देश्य तिब्बत को जलवायु परिवर्तन और वैश्विक पारिस्थितिकी पर होनेवाली सभी चर्चाओं के केंद्र में रखवाना और वैश्विक जलवायु के लिए इसके प्रासंगिक महत्व को सामने लाना है।

इसके लिए सीटीए ने पांच सूत्रीय कार्रवाई का आह्वान किया है-
ऽ जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र फ्रेमवर्क कन्वेंशन (यूएनएफसीसीसी) को तिब्बती पठार के वैश्विक पारिस्थितिक महत्व को समझना चाहिए
ऽ यूएनएफसीसीसी को तिब्बती पठार पर जलवायु परिवर्तन अनुसंधान को मजबूत करना चाहिए
ऽ चीनी सरकार को तिब्बत के पारंपरिक ज्ञान और वहां की जीवन-शैली का सम्मान करना चाहिए
ऽ चीनी सरकार को तिब्बत में शहरीकरण और पर्यटन को सख्ती से नियमित करना चाहिए
ऽ अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को तिब्बत के लिए इस वैश्विक ‘तिब्बत के लिए जलवायु कार्रवाईः पृथ्वी के तीसरे ध्रुव’ अभियान को आगे बढ़ाने की जरूरत है। (विस्तार से पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)

यह पांच सूत्री कार्रवाई आह्वान पांच भाषाओं-तिब्बती, अंग्रेजी, हिन्दी, चीनी और स्पेनी, में उपलब्ध है।

तिब्बती लोगों की पर्यावरण संबंधी चिंताओं को ध्यान में रखते हुए तिब्बत नीति संस्थान में पर्यावरण और विकास डेस्क के प्रमुख श्री टेम्पा ग्यालत्सेन झम्पा ने कहा, ‘तिब्बत में 2016 के बाद से बाढ़ और भूस्खलन के मामलों में बढ़ोतरी देखी गई है। यह बढ़ोतरी अब तक मुख्य रूप से जलवायु परिवर्तन के कारण थी लेकिन अब यह तिब्बत में हाल के वर्षों में खनन और निर्माण गतिविधियों के कारण हो रही हैं।‘ उन्होंने चीनी सरकार से तिब्बती क्षेत्र में संभावित आपदाओं और इसके प्रभावों को कम करने के लिए अधिक सक्रिय जलवायु जागरूकता कार्यक्रम चलाने, अनुकूलन और दुष्प्रभावों को कम करने के प्रयासों को लागू करने और एक उचित आपदा राहत तंत्र स्थापित करने का आग्रह किया।‘

कॉप-25 संयुक्त राष्ट्र जलवायु शिखर सम्मेलन में सीटीए तिब्बत को जलवायु परिवर्तन पर होनेवाली चर्चा के केंद्र में लाने की दिशा में कई कार्यक्रम प्रस्तुत करेगा।


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