
फ्लशिंग, न्यूयॉर्क, 6 अक्टूबर 2026: चीन के लोकतंत्र समर्थक प्रवासी संगठनों ने मंगलवार को फ्लशिंग में एक मंच का आयोजन किया, जिसमें बीजिंग द्वारा हाल ही में लागू किए गए “जातीय एकता और प्रगति को बढ़ावा देने संबंधी कानून” की निंदा की गई। यह कार्यक्रम चीन गणराज्य (ताइवान) के “डबल टेन” राष्ट्रीय दिवस की 115वीं वर्षगांठ के समारोहों के साथ आयोजित किया गया। इसका आयोजन बीजिंग स्प्रिंग पत्रिका, चाइनीज़ अलायंस फॉर डेमोक्रेसी और चाइना डेमोक्रेसी पार्टी की कार्यकारी समिति ने किया। आयोजकों ने इस सम्मेलन में विदेशों में रहने वाले चीनी विद्वानों, लोकतंत्र कार्यकर्ताओं और स्वतंत्र पत्रकारों को एक साथ लाया।
बीजिंग स्प्रिंग के प्रकाशक डॉ. यू दाहाई ने सम्मेलन की मेजबानी की और उद्घाटन भाषण दिया। इसके बाद पत्रिका के मानद प्रधान संपादक हू पिंग ने मुख्य वक्तव्य प्रस्तुत किया। पाँच पैनल सत्रों में 20 से अधिक चीनी विद्वानों और लोकतंत्र कार्यकर्ताओं ने अपने विचार रखे। प्रमुख वक्ताओं में राजनीतिक टिप्पणीकार चेन पोकोंग, वकील गाओ गुआंगजुन, तिब्बत-चीन मैत्री समूह के अध्यक्ष शुए वेई और चाइनीज़ अलायंस फॉर डेमोक्रेसी के अध्यक्ष चेन लिचुन शामिल थे। वाशिंगटन डी.सी. स्थित तिब्बत कार्यालय के चीनी संपर्क अधिकारी त्सुल्त्रिम ग्यात्सो को भी वक्ता के रूप में आमंत्रित किया गया था।
अपने मुख्य वक्तव्य में हू पिंग ने कहा कि यद्यपि इस कानून में परम पावन दलाई लामा या तिब्बती बौद्ध धर्म का स्पष्ट रूप से उल्लेख नहीं किया गया है, फिर भी इसके प्रभाव तिब्बतियों के मूल अधिकारों को छीनकर उनकी पहचान को सीधे तौर पर नुकसान पहुँचाते हैं। उन्होंने चीनी कम्युनिस्ट शासन की जातीय अल्पसंख्यकों के प्रति कठोर नीतियों की निंदा करते हुए चीनी नेतृत्व के उन सदस्यों द्वारा शी जिनपिंग को भेजे गए एक पत्र का भी उल्लेख किया, जिन्हें चीन में “प्रिंसलिंग” कहा जाता है। ये नेता चीनी कम्युनिस्ट शासन के उच्च पदस्थ नेताओं के परिवारों से संबंधित हैं।
चेन लिचुन ने उन समुदायों से माफी माँगी जो इस कानून से सीधे तौर पर प्रभावित हुए हैं। उन्होंने तिब्बतियों और अन्य जातीय समूहों के खिलाफ चीनी कम्युनिस्ट पार्टी की निर्मम नीतियों की निंदा की।
अन्य वक्ताओं ने तर्क दिया कि यद्यपि इस कानून को एकता को बढ़ावा देने के उपाय के रूप में प्रस्तुत किया गया है, लेकिन वास्तव में यह अनिवार्य “जातीय पहचान” और “राष्ट्रीय एकीकरण” की आधिकारिक विचारधारा को और मजबूत करता है। इससे राजनीतिक दबाव बढ़ता है और अल्पसंख्यक समुदायों की धार्मिक, सांस्कृतिक तथा राजनीतिक गतिविधियों पर गंभीर प्रतिबंध लगते हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि गैर-हान जातीय समुदायों के लोगों को केवल अपनी शिकायतें और असंतोष व्यक्त करने के कारण अलगाववादी या आतंकवादी करार दिए जाने का खतरा है।
त्सुल्त्रिम ग्यात्सो ने कहा कि यह कानून अपने घोषित उद्देश्य के बिल्कुल विपरीत परिणाम उत्पन्न करता है। उनके अनुसार, एकता को बढ़ावा देने के बजाय यह जातीय अल्पसंख्यकों के संवैधानिक अधिकारों को छीनता है और “चीनी राष्ट्र के लिए एक मजबूत सामुदायिक भावना विकसित करने” के नारे के तहत हान-केंद्रित आत्मसातीकरण की नीति को कानूनी रूप देता है।
उन्होंने तिब्बत में आत्मसातीकरण की जड़ों को 1950 के सैन्य आक्रमण से जोड़ते हुए कहा कि 2000 के दशक की शुरुआत में चीनी विद्वानों मा रोंग, हू आनगांग और हू लियान्हे द्वारा समर्थित “दूसरी पीढ़ी की जातीय नीति” ने इस कानून का मार्ग प्रशस्त किया। यह कानून 1 जुलाई से लागू हुआ।
त्सुल्त्रिम ग्यात्सो ने वर्तमान में सरकारी आवासीय विद्यालयों में रखे गए दस लाख से अधिक तिब्बती बच्चों की गंभीर स्थिति की ओर ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने कहा कि इनमें से कई बच्चे व्यवस्थित रूप से अपनी मातृभाषा खो रहे हैं।
उन्होंने 2 जुलाई को संयुक्त राष्ट्र के बाहर लोबगा रंगज़ेन द्वारा आत्मदाह किए जाने की घटना का उल्लेख किया। उनके अनुसार, यह घटना इससे पहले हुई लगभग 170 ऐसी घटनाओं के बाद सामने आई और इसने संकट की ओर दुनिया का ध्यान एक बार फिर आकर्षित किया।
उन्होंने आगे कहा कि यह कानून अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार मानकों, चीन के संविधान और क्षेत्रीय जातीय स्वायत्तता संबंधी कानून का उल्लंघन करता है। उन्होंने चेतावनी दी कि कानून की धारा 63 का इस्तेमाल विदेशों में रहने वाले तिब्बतियों और उनके समर्थकों के खिलाफ हथियार के रूप में किया जा सकता है।
अंत में, उन्होंने बताया कि कानून की धारा 56 के तहत अनिवार्य की गई “जातीय एकता प्रचार सप्ताह” के जवाब में तिब्बती प्रशासन ने सितंबर के अंतिम सप्ताह को “तिब्बती राष्ट्रीय पहचान जागरूकता सप्ताह” घोषित किया। इसका औपचारिक शुभारंभ 23 सितंबर 2026 को हुआ।
सम्मेलन का समापन इस कानून की एकजुट होकर निंदा करने और चीनी कम्युनिस्ट पार्टी से इसे तत्काल निरस्त करने की जोरदार अपील के साथ हुआ।
इसके बाद उत्तरी अमेरिका में वितरित होने वाले एक प्रमुख चीनी भाषा के समाचार पत्र वर्ल्ड जर्नल ने भी इस कार्यक्रम पर एक रिपोर्ट प्रकाशित की।
— रिपोर्ट: तिब्बत कार्यालय, वाशिंगटन डी.सी.











