भाषा
བོད་ཡིག中文English
  • मुख पृष्ठ
  • समाचार
    • वर्तमान तिब्बत
    • तिब्बत समर्थक
    • लेख व विचार
    • कला-संस्कृति
    • विविधा
  • हमारे बारे में
  • तिब्बत एक तथ्य
    • तिब्बत:संक्षिप्त इतिहास
    • तिब्बतःएक अवलोकन
    • तिब्बती राष्ट्रीय ध्वज
    • तिब्बती राष्ट्र गान (हिन्दी)
    • तिब्बत स्वायत्तशासी क्षेत्र
    • तिब्बत पर चीनी कब्जा : अवलोकन
    • निर्वासन में तिब्बती समुदाय
  • केंद्रीय तिब्बती प्रशासन
    • संविधान
    • नेतृत्व
    • न्यायपालिका
    • विधायिका
    • कार्यपालिका
    • चुनाव आयोग
    • लोक सेवा आयोग
    • महालेखा परीक्षक
    • १७ केंद्रीय तिब्बती प्रशासन आधिकारिक छुट्टियां
    • CTA वर्चुअल टूर
  • विभाग
    • धर्म एवं सांस्कृति विभाग
    • गृह विभाग
    • वित्त विभाग
    • शिक्षा विभाग
    • सुरक्षा विभाग
    • सूचना एवं अंतर्राष्ट्रीय संबंध विभाग
    • स्वास्थ विभाग
  • महत्वपूर्ण मुद्दे
    • तिब्बत जो मुद्दे सामना कर रहा
    • चीन-तिब्बत संवाद
    • मध्य मार्ग दृष्टिकोण
  • वक्तव्य
    • परम पावन दलाई लामा द्वारा
    • कशाग द्वारा
    • निर्वासित संसद द्वारा
    • अन्य
  • मीडिया
    • तस्वीरें
    • विडियो
    • प्रकाशन
    • पत्रिका
    • न्यूज़लेटर
  • तिब्बत समर्थक समूह
    • कोर ग्रुप फॉर तिब्बतन कॉज़ – इंडिया
    • भारत तिब्बत मैत्री संघ
    • भारत तिब्बत सहयोग मंच
    • हिमालयन कमेटी फॉर एक्शन ऑन तिबेट
    • युथ लिब्रेशन फ्रंट फ़ॉर तिबेट
    • हिमालय परिवार
    • नेशनल कैंपेन फॉर फ्री तिबेट सपोर्ट
    • समता सैनिक दल
    • इंडिया तिबेट फ्रेंडशिप एसोसिएशन
    • फ्रेंड्स ऑफ़ तिबेट
    • अंतरष्ट्रिया भारत तिब्बत सहयोग समिति
    • अन्य
  • संपर्क
  • सहयोग
    • अपील
    • ब्लू बुक

लगता नहीं गुरु जी मानेगा, वो बडा जिद्दी है।

March 22, 2011

धर्मशाला, 21 मार्च । धर्म गुरुओं , राजाओं -महाराजाओं के राज की व्यवस्था अब आउट डेटिड हो चुकी है। ऐसे में यह जुरुरी हो गया है कि पछले 400 सालों से तिब्बत में चल रही आर्मिक नेतृत्व की प्रथा का भी अब अंत होना ही चाहिए। निर्वासित तिब्बती सरकार के द्वारा महामहिम दलाई लामा द्वारा राजनीतिक पद से दिए गए इस्तीफे के लौटाने के बाद अब दलाई लामा के अपने फैसले के प्रति तेवर खासे कडें हो गए है। दलाई लामा के निजी ऑफिस ने बाकादा अपनी सरकारी व्यवस्था यानी निर्वासित तिब्बती सरकार के नुमाइंदों को यह बता दिया है कि अब दलाई लामा नहीं, बल्कि अन्य लोगों को अपनी सोच बदलनी होगी और दलाई लामा किसी भी सूरत में अब यह पद नहीं सभांलेगे । बकौल महाहिम , वक्त बदलने के साथ अब तिब्बती व्यवस्थाओं में भी बदलाव जरुरी है। दलाई लामा ने साफ कर दिया कि अगर सदन से उनके पास पुनर्विचार के लिए प्रस्ताव आता भी है, तो वह अपनी राय नहीं बदलेंगे। दलाई लामा के फैसले के प्रति अडिग सोच का आभास इनके इसी बयान से मिल जाता है कि जिसमें उन्होंने यह कहा कि अभी तिब्बती वी वांट फ्री तिब्बत के नारे लगाते है और नारें से आजादी नहीं मिलेगी । उन्होंने तिब्बत की आजादी के बावत कहा कि यह तभी संभव है, जब इसमें चीन की रजामंदी भी होगी। दलाई लामा के इन्हीं बयानों का नतीजा है कि अब तिब्बती लोग भी कहीं न कहीं अपने श्रद्धेय गुरु के बयान का मर्म समझने शुरु हो गए है। प्रख्यात तिब्बती एक्टिविसट और लेखक तेनजिन सूंडू तिब्बती टोन में हिंदी में कहते है कि लगता नहीं गुरु जी मानेगा , वो बडा जिद्दी है और अब निर्वासित तिब्बती सरकार के नुमाइंदों को भी यह समझना होगा कि उन्हें जिम्मेदारियां उठानी है और इसके लिए तैयार होना ही होगा। इसी तर्ज पर निर्वासित तिब्बती सरकार के प्रधानमंत्री प्रो. सामदोंग रिंपोछे को यह उम्मीद से लवरेज विश्वास है कि महामहिम अपने फैसले से पीछे नहीं हटेंगे । गुरु जी , बडा जिद्दी लगता है नहीं मानेगा कि यह जो धारणा अब बल पकडने लगी है, उससे कहीं न कहीं यह संकेत भी मिलने शुरु हो गए है कि अब सच में गुरु जिद्द पकड चुके है और उनके अनुयायियों ने अपनी जिद्द त्यागने का मन भी बना लिया है । शायद अब जो कवायदें चल रही है, वह सिर्फ इसी खातिर है कि कल को कोई यह न कहे कि अपने धर्म गुरु को बिना मनाए , उनके पद से रुखस्त कर दिया गया।


विशेष पोस्ट

परम पावन दलाई लामा लेह के सिंधु घाट पर उत्सवी दोपहर भोज में शामिल हुए

22 Aug at 9:36 am

लुधियाना के तिब्बती व्यापारी संघ ने परम पावन दलाई लामा के सम्मान में ‘करुणा वर्ष’ और भारत का ७९वां स्वतंत्रता दिवस मनाया

18 Aug at 10:55 am

लेह स्थित लद्दाख बौद्ध संघ और लद्दाख गोंपा संघ की दीर्घायु प्रार्थना में शामिल हुए परम पावन दलाई लामा १७ अगस्त, २०२५

17 Aug at 10:32 am

सिक्योंग पेनपा त्सेरिंग ने वाराणसी में केंद्रीय उच्च तिब्बती अध्ययन संस्थान का दौरा किया, नामांकन में गिरावट पर चिंता व्यक्त की

11 Aug at 9:40 am

चिली में सार्वजनिक व्याख्यान “तिब्बत की प्रतिध्वनियाँ: निर्वासन में संस्कृति और परंपरा के माध्यम से पहचान को बनाए रखना” के माध्यम से तिब्बती संस्कृति और वकालत पर प्रकाश डाला गया

10 Aug at 10:51 am

संबंधित पोस्ट

चीन कॉलेज प्रवेश परीक्षा में तिब्बती भाषा को प्रतिबंधित करेगा

3 weeks ago

तिब्बत की नदी पर जल-युद्ध तेज करने की चीनी रणनीति

4 weeks ago

तिब्बती राजनीतिक नेता ने दलाई लामा के पुनर्जन्म पर चीनी राजदूत की टिप्पणी की निंदा की

1 month ago

दलाई लामा का पुनर्जन्म नास्तिक चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (सीसीपी) का कोई मामला नहीं है।

1 month ago

‘पिंजरे में बंद पक्षी के समान’: चीन इसी तरह तिब्बतियों के स्वतंत्र आवागमन को प्रतिबंधित करता है

3 months ago

हमारे बारे में

महत्वपूर्ण मुद्दे
तिब्बत जो मुद्दे सामना कर रहा
मध्य मार्ग दृष्टिकोण
चीन-तिब्बत संवाद

सहयोग
अपील
ब्लू बुक

CTA वर्चुअल टूर

तिब्बत:एक तथ्य
तिब्बत:संक्षिप्त इतिहास
तिब्बतःएक अवलोकन
तिब्बती:राष्ट्रीय ध्वज
तिब्बत राष्ट्र गान(हिन्दी)
तिब्बत:स्वायत्तशासी क्षेत्र
तिब्बत पर चीनी कब्जा:अवलोकन
निर्वासन में तिब्बती समुदाय

केंद्रीय तिब्बती प्रशासन
संविधान
नेतृत्व
न्यायपालिका
विधायिका
कार्यपालिका
चुनाव आयोग
लोक सेवा आयोग
महालेखा परीक्षक
१७ केंद्रीय तिब्बती प्रशासन आधिकारिक छुट्टियां

केंद्रीय तिब्बती विभाग
धार्मीक एवं संस्कृति विभाग
गृह विभाग
वित्त विभाग
शिक्षा विभाग
सुरक्षा विभाग
सूचना एवं अंतर्राष्ट्रीय संबंध विभाग
स्वास्थ विभाग

संपर्क
भारत तिब्बत समन्वय केंद्र
एच-10, दूसरी मंजिल
लाजपत नगर – 3
नई दिल्ली – 110024, भारत
दूरभाष: 011 – 29830578, 29840968
ई-मेल: [email protected]

2021 India Tibet Coordination Office • Privacy Policy • Terms of Service