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दलाई लामा सहित अन्य नोबेल शांति विजेताओं ने यूक्रेन में परमाणु हथियारों का उपयोग नहीं करने की मांग की

March 26, 2022

commondreams.org 

दलाई लामा समेत १६ नोबेल शांति पुरस्कार विजेताओं ने शनिवार को संयुक्त रूप से एक पत्र जारी कर यूक्रेन पर हमले को शीघ्र समाप्त करने का आह्वान किया। इसके साथ ही रूस और नाटो दोनों सेनाओं से एक स्पष्ट प्रतिज्ञा करने की अपील की कि इस युद्ध या किसी अन्य संघर्ष में परमाणु हथियारों का प्रयोग नहीं किया जाएगा।

पत्र में यह घोषणा किया है कि, ‘हम युद्ध और परमाणु हथियारों को अस्वीकार करते हैं। हम दुनिया के अपने साथी नागरिकों को आह्वान करते हैं कि वे हम सबका सामूहिक घर हमारे ग्रह को उन लोगों से बचाने के लिए हमारे साथ जुड़ें जो इसे नष्ट करने की धमकी दे रहे हैं।’

इस पत्र को १९८५ में नोबेल पुरस्कार विजेता इंटरनेशनल फिजिशियन फॉर द प्रिवेंशन ऑफ न्यूक्लियर वॉर (आईपीपीएनडब्ल्यू) और इसी तरह की एडवोकेसी के लिए २०१७ में पुरस्कार से सम्मानित इंटरनेशनल कैंपेन टू एबोलिश न्यूक्लियर वेपन्स (आईसीएएन) ने समर्थन किया है। इस पत्र पर अन्य दस लोगों ने भी हस्ताक्षर किए हैं। इनमें जॉडी विलियम्स, कैलाश सत्यार्थी और स्कॉर एरियस सांचेज़ के साथ ही १९१० में पुरस्कार से सम्मानित इंटरनेशनल पीस ब्यूरो, अमेरिकन फ्रेंड्स सर्विस कमेटी (१९४७) और पगवाश कांफ्रेंस ऑन साइंस एंड वर्ल्ड अफेसर (१९९५) भी शामिल हैं।

पत्र में आगे कहा गया है, ‘यूक्रेन पर आक्रमण ने वहां के लोगों के लिए मानवीय संकट पैदा कर दिया है। इस समय पूरी दुनिया इतिहास के सबसे बड़े खतरे का सामना कर रही है। यह खतरा बड़े पैमाने पर परमाणु युद्ध का है, जो हमारी सभ्यता को नष्ट करने में सक्षम है और पृथ्वी पर विशाल पारिस्थितिक क्षति का कारण बन रहा है।’

खुले पत्र में तत्काल युद्धविराम समझौते और यूक्रेन से सभी रूसी सैनिकों की वापसी का आह्वान किया गया है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, एक महीने से अधिक की लड़ाई में हजारों यूक्रेनी नागरिक मारे गए हैं और लाखों यूक्रेनी शरणार्थी बनकर देश की सीमा से भागकर पड़ोसी देशों में चले गए हैं, जबकि लाखों लोग देश के भीतर आंतरिक रूप से विस्थापित हो गए हैं।

पत्र में २७ फरवरी को रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन द्वारा अपनी सेना को परमाणु बलों को ‘विशेष अलर्ट’ पर रखने का आदेश देने के मद्देनजर युद्ध में परमाणु हथियारों के संभावित प्रयोग पर चिंता जताई गई है। परमाणु विरोधी समूह ग्लोबल जीरो द्वारा रूस के इस आशंकित कदम को तुरंत ‘अस्वीकार्य और लापरवाही भरा कदम’ बताते हुए इसकी कड़ी निंदा की गई है।

तब से यह चिंता बढ़ती जा रही है कि पुतिन तथाकथित ‘सामरिक परमाणु हथियार’ के उपयोग का सहारा ले सकते हैं। इन हथियारों को कुछ ने बड़े विनाशकारी हथियारों की तुलना में कम खतरनाक या विनाशकारी रूप में सही ठहराने की कोशिश की है। इस तरह के तर्क को कॉमन ड्रीम्स ने इस सप्ताह की शुरुआत में अपनी रिपोर्ट में पूरी तरह से खारिज कर दिया है।

इस सप्ताह प्लॉऊशेयर फंड के अध्यक्ष जो सर्कियोन ने लिखा है कि ‘यहां जो कोई भी छोटे परमाणु हथियार के प्रयोग का सुझाव दे रहा है, वह परमाणु युद्ध की वास्तविकता से पूरी तरह से अनभिज्ञ है। यहां तक कि सबसे छोटे से छोटा परमाणु विस्फोट भी बड़े से बड़ा पारंपरिक बम की तुलना में कई गुना अधिक शक्तिशाली होगा जिसका दुष्परिणाम कल्पनातीत होगा।’

नोबेल पुरस्कार विजेताओं ने शनिवार को जारी खुले पत्र में युद्ध को समाप्त करने के अलावा इस बात पर मुखर वादा करने का आह्वान किया है कि यूक्रेन में युद्ध के दौरान परमाणु हथियारों का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा। पत्र में दुनिया के सभी देशों का ‘परमाणु हथियार निषेध संधि’ का समर्थन करने का आह्वान किया गया है, जिसमें यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया गया है कि हम फिर कभी परमाणु खतरे जैसे क्षण का सामना न करने पाएं।’

पत्र के अंत में कहा गया है, ‘या तो परमाणु हथियारों का अंत करें नहीं तो हमारा अंत निश्चित है।’


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