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की लारुंग गार बौद्ध अकादमी पर प्रतिबंध बढ़ा, सेना का जमाबड़ा बढ़ाया

December 27, 2024

धर्मशाला। तिब्बत से हाल ही में प्राप्त रिपोर्टों के अनुसार, चीन ने दुनिया के सबसे बड़े तिब्बती बौद्ध अध्ययन केंद्र लारुंग गार बौद्ध अकादमी में बड़ी संख्या में सैन्य बल तैनात कर दिए हैं। लारुंग गार मठ तिब्बत के पारंपरिक खाम प्रांत के करज़े के सेरथर (चीनी: सेडा) काउंटी में स्थित है, जिसे सिचुआन प्रांत में शामिल किया गया है।

ड्रैकगो (चीनी: लुहुओ) और करज़े (चीनी: गंजी) के पड़ोसी काउंटियों से लगभग ४०० चीनी सैनिक २० दिसंबर २०२४ को लारुंग गार पहुंचे। तैनाती के साथ हेलीकॉप्टर निगरानी भी की गई, जो धार्मिक स्थल पर निगरानी गतिविधियों में तेजी लाने का संकेत है।

विश्वसनीय सूत्रों से पता चलता है कि २०२५ से नए कड़े नियमों की योजना बनाई गई है। ये नीतियां कथित तौर पर लारुंग गार में निवास को अधिकतम १५ वर्षों तक सीमित कर देंगी और सभी भिक्षुओं और भिक्षुणियों के पंजीकरण को आवश्यक बना दिया जाएगा। इसके अलावा, अधिकारी संस्था में धार्मिक अनुयायियों की संख्या कम करने की योजना बना रहे हैं। चीनी छात्रों को कथित तौर पर मठ छोड़ने के लिए कहा जा रहा है, जो मठ की आबादी को कम करने के चीनी सरकार के दृष्टिकोण की ही पुष्टि करता है।

यह नई सरकारी गतिविधि लारुंग गार में व्यवस्थित प्रतिबंधों के पैटर्न के अनुरूप है। लारुंग गार में इससे पहले २००१ और २०१६-२०१७ में बड़ी कार्रवाई की गई थी। इस दौरान हजारों आवासीय इमारतों को ध्वस्त कर दिया गया था और कई साधकों को वहां से जबरन बेदखल कर दिया गया था।

लारुंग गार को दुनिया का सबसे बड़ा तिब्बती बौद्ध संस्थान कहा जाता है। १९८० में स्थापित अकादमी और मठ पूर्वी तिब्बत के सेरथर काउंटी में एक पहाड़ी पर अवस्थित है। यहां हजारों बौद्ध भिक्षु और भिक्षुणियां आती हैं और यहां उन्हें शिक्षा दी जाती हैं। इस प्रसिद्ध संस्थान का विध्वंस २० जुलाई २०१६ को शुरू हुआ और मई २०१७ की शुरुआत तक जारी रहा। लारुंग गार की आबादी पिछले वर्षों में उसकी मूल आबादी लगभग १०,००० से लगभग आधी रह गई है।

नवीनतम प्रतिबंधात्मक गतिविधि तिब्बत में धार्मिक स्वतंत्रता को प्रतिबंधित करने के चीन के व्यापक अभियान में वृद्धि के संकेत हैं। यहां पारंपरिक बौद्ध संस्थाओं को धार्मिक परंपराओं और शिक्षा को नियंत्रित करने के उद्देश्य से सरकार की नीतियों के तहत बढ़ते दबाव का सामना करना पड़ रहा है।


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