
धर्मशाला: भारत के राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जयंती के अवसर पर केंद्रीय तिब्बती प्रशासन (CTA) के नेतृत्व एवं कर्मचारियों ने गंगचेन क्यिशोंग स्थित टी-बिल्डिंग के सामने एकत्र होकर अपने भारतीय भाइयों और बहनों के साथ इस महत्वपूर्ण दिवस का स्मरण किया।
इस अवसर पर मुख्य न्याय आयुक्त येशी वांगमो, संसद अध्यक्ष डोल्मा छेरिंग तेयखांग, सिक्योंग पेनपा छेरिंग, उपाध्यक्ष खेनपो सोनम फुंटशोक, न्याय आयुक्त दावा फुंकी और फागपा छेरिंग, कालोन त्सेग्याल चुक्या द्रान्यी, कालोन पालदेन धोंडुप, कालोन त्सेरिंग धोंडुप ग्यांगसेर, कालोन कुंगा ताशी और कालोन पेमा त्सो, मुख्य निर्वाचन आयुक्त लोबसंग येशी, लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष कर्मा येशी, महालेखा परीक्षक ताशी तोपग्याल, तिब्बती निर्वासित संसद की स्थायी समिति के सदस्य तथा केंद्रीय तिब्बती प्रशासन के सचिव एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।
तिब्बती नेतृत्व ने अहिंसा और संवाद के माध्यम से स्वतंत्रता एवं न्याय के लिए तिब्बती संघर्ष को आगे बढ़ाने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित की। महात्मा गांधी अहिंसा के महान प्रवर्तक तथा नागरिक अधिकारों और भारत की स्वतंत्रता के लिए संघर्ष करने वाले विश्वविख्यात नेता थे।
महात्मा गांधी के सिद्धांतों और उनके मार्ग के प्रति परम पावन 14वें दलाई लामा की लंबे समय से गहरी श्रद्धा रही है। अहिंसा और शांतिपूर्ण संवाद के प्रति परम पावन की आजीवन प्रतिबद्धता महात्मा गांधी द्वारा प्रतिपादित मूल्यों और आदर्शों को प्रतिबिंबित करती है।
समारोह के दौरान सिक्योंग पेनपा छेरिंग ने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि महात्मा गांधी के अहिंसक प्रतिरोध के दर्शन और उनके व्यवहारिक प्रयोग ने बाद के अनेक आंदोलनों और नेताओं को गहराई से प्रभावित किया, जिनमें नेल्सन मंडेला, मार्टिन लूथर किंग जूनियर और परम पावन दलाई लामा शामिल हैं। इन सभी ने न्याय, समानता और स्वतंत्रता के लिए अपने-अपने संघर्षों में इन सिद्धांतों से प्रेरणा प्राप्त की।







