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छह तिब्बती लेखकों-कार्यकर्ताओं को चीन ने ‘राष्‍ट्रीय सुरक्षा’ को खतरा होने के आरोप में सजा सुनाई

October 29, 2022

छह तिब्बती लेखकों–कार्यकर्ताओं को चीन ने ‘राष्‍ट्रीय सुरक्षा‘ को खतरा होने के आरोप में सजा सुनाई

 चीनी शासन का विरोध करने वाली गतिविधियों के लिए सभी छह को पहले जेल भेजा गया था।

 rfa.org / सांगयाल कुंचोक

१८ अक्तूबर, २०२२

तिब्बती सूत्रों का कहना है कि तिब्बत में चीनी अधिकारियों ने ‘अलगाववाद को उकसाने’और ‘राष्‍ट्रीय की सुरक्षा को खतरे में डालने’के आरोप में छह तिब्बती लेखकों और कार्यकर्ताओं को चार से १४ साल तक की कैद की सजा सुनाई है।

निर्वासन में रह रहे एक सूत्र ने बताया कि छह लोगों को सितंबर में सिचुआन प्रांत के कार्देज़ (चीनी-गांजी में) तिब्बती स्वायत्त प्रीफेक्चर में उनकी गिरफ्तारी के बाद एक से दो साल तक तनहाई कैद में रखने के बाद सजा सुनाई गई है।

आरएफएके सूत्र ने बताया कि यह सब पूरी तरह से गोपनीयता में किया गया था।स्विट्जरलैंड में रहने वाले एक पूर्व राजनीतिक कैदी गोलोग जिग्मे ने क्षेत्र में संपर्कों का हवाला देते हुए कहा, ‘तिब्बत के अंदर कड़े प्रतिबंधों और निरंतर जांच के कारणउनकी वर्तमान स्वास्थ्य स्थितियों या उन्हें कहां रखा जा रहा है, इसके बारे में अधिक विस्तृत जानकारी प्राप्त करना अब बहुत मुश्किल है।‘

कार्देज़ पीपुल्स कोर्ट द्वारा सज़ा दिए जाने के कारण लेखक और पूर्व स्कूली शिक्षक गंगकी द्रुपा क्याब १४ साल की जेल की सजा काट रहे हैं। इसी तरहलेखक और पर्यावरण कार्यकर्ता सेयनम को छह साल और राजनीतिक कार्यकर्ता गंगबू युद्रम को सात साल की सजा काट रहे हैं।

कार्देज़ की अदालत द्वारा राजनीतिक कार्यकर्ता त्सेरिंग डोलमा को आठ साल,लेखक पेमा रिनचेन को चार साल और राजनीतिक कार्यकर्ता समदुप को आठ साल की सजा सुनाई गई है।

अपनी गतिविधियों के लिए पिछली जेल की सजा काट रहे इस समूह की गिरफ्तारी और सजा तिब्बती क्षेत्रों में आधिकारिक चीनी नीतियों और विचार के खिलाफ जीवन जीने वाले और विचार रखनेवाले पुरुषों और महिलाओं को सबक सि‍खाने के लिए बीजिंग द्वारा जारी अभियान को ही रेखांकित करता है।

पूर्व में स्वतंत्र राष्ट्रतिब्बत पर चीनी सरकार द्वारा आक्रमण किया गया था और ७०साल से अधिक समय पहले बलपूर्वक चीन में शामिल कर लिया गया थाऔर तिब्बती आध्यात्मिक नेता दलाई लामा और उनके हजारों अनुयायी बाद में भारत और दुनिया भर के अन्य देशों में चीन के शासन के खिलाफ १९५९ के असफल राष्ट्रीय विद्रोह के बाद निर्वासन में भाग गए थे।

चीनी अधिकारियों ने तिब्बतियों की राजनीतिक गतिविधियों और सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान को बचाने के लिए शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन की अभिव्यक्ति पर रोक लगा दिया है। इसके साथ ही तिब्बतियों को उत्पीड़न, यातना, कारावास और न्‍यायेतर हत्याओं के दौर से गुजरना पड़ रहा है। चीन ने इन हथकंडों को अपनाकर इस क्षेत्र पर एक मजबूत पकड़ बनाए रखी है।


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