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‘पिंजरे में बंद पक्षी के समान’: चीन इसी तरह तिब्बतियों के स्वतंत्र आवागमन को प्रतिबंधित करता है

June 4, 2025

बीजिंग की भेदभावपूर्ण पासपोर्ट नीति असल में आवागमन प्रतिबंधों के माध्यम से तिब्बती आध्यात्मिक और सांस्कृतिक पहचान को खत्म करने के एक व्यवस्थित प्रयास का हिस्सा है।
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तेनज़िन दल्हा

सदियों से तीर्थयात्राएं तिब्बती बौद्ध संस्कृति की आध्यात्मिक रीढ़ रही हैं। तिब्बत के भीतर और बाहर तीर्थों की ये पवित्र यात्राएं धार्मिक अनुष्ठानों से कहीं अधिक हैं। वे सांस्कृतिक निरंतरता, पारिवारिक संबंधों और सामूहिक पहचान का प्रतीक हैं। हालांकि, आज चीनी सरकार की यात्रा पर प्रतिबंध लगाने की नीतियों ने आस्था की इन मौलिक अभिव्यक्तियों को सरकारी निगरानी और नियंत्रण में बदल दिया है।

तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र (टीएआर) में तिब्बती और हान नागरिकों के बीच पासपोर्ट बनवाने में असमानता जातीय भेदभाव के एक परेशान करने वाले ढर्रे को उजागर करती है। यह अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार मानकों का भी उल्लंघन करती है। जबकि मानवाधिकारों की सार्वभौमिक घोषणा के अनुच्छेद- १३ में आवागमन की स्वतंत्रता निहित है, बीजिंग की नीतियां तिब्बती आबादी को इस मूल अधिकार से प्रभावी रूप से वंचित करती हैं।

पासपोर्ट विरोधाभास: तिब्बत में व्यवस्थित यात्रा प्रतिबंध
चीनी अधिकारियों ने दशकों से व्यवस्थित रूप से टीएआर और अन्य तिब्बती आबादी वाले क्षेत्रों में रहने वाले तिब्बतियों को पासपोर्ट जारी करने पर प्रतिबंध लगा रखा है। जबकि हान मूल के नागरिक इन क्षेत्रों के भीतर और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी बिना किसी प्रतिबंध के आवागमन का आनंद लेते हैं। यह पूरी तरह से नस्लीय भेदभाव के आधार पर नागरिक अधिकारों की दो-स्तरीय पदानुक्रमित प्रणाली बनाता है।

पासपोर्ट आवेदन प्रक्रिया में तिब्बतियों की यात्रा को हतोत्साहित करने के लिए जटिल प्रक्रियाएं शामिल की गई हैं। आवेदकों को ऐसे जमानतदार प्रस्तुत करने होते हैं, जो सरकारी पदों पर हों और पासपोर्ट धारक द्वारा विदेश में की जाने वाली प्रत्येक कार्रवाई के लिए खुद को उत्तरदायी मानें। यदि यात्री चीनी अधिकारियों द्वारा राजनीतिक रूप से संवेदनशील समझी जाने वाली किसी भी गतिविधि में शामिल होता है, तो जमानतदार को नौकरी से निकाले जाने, लाभों से वंचित होने और करियर में आगे बढ़ने में बाधा का सामना करना पड़ सकता है। इससे मिलीभगत का एक नेटवर्क तैयार होता है, जहां सरकारी कर्मचारी स्वाभाविक रूप से जमानत लेने से इनकार कर देते हैं, क्योंकि उन्हें अपनी आजीविका पर खतरे का डर होता है।

इस प्रणाली का सबसे घातक असर परिवारों को एक-दूसरे के खिलाफ़ खड़ा करना है। नौकरशाही के चक्रव्यूह में फंसे तिब्बतियों को रिश्तेदारों की ओर से यात्रा की योजना छोड़ने का दबाव झेलना पड़ता है। इन समझौतों का उल्लंघन करने वाले किसी भी व्यक्ति को सामूहिक रूप से कठोर दंड दिए जाने से तिब्बती पासपोर्ट के लिए आवेदन करने से कतराने लगे हैं। इससे स्व-विनियमन सामाजिक नियंत्रण का निर्माण होता है, जहां परिवार खुद ही निगरानी करते हैं। इस तरह बिना किसी प्रत्यक्ष हस्तक्षेप के परिवार के लोग ही सरकार की निगरानी का काम करते हैं।

चीनी अधिकारी व्यवस्थित प्रतिबंधों को लागू करने की बात से इनकार करते हैं और देरी के लिए नियमित ‘नौकरशाही प्रक्रियाओं’ को जिम्मेदार ठहराते हैं। हालांकि, जो सबूत सामने आ रहे हैं, वे इन दावों का खंडन करते हैं। तरीका बहुत सुसंगत है, बाधाएं बहुत विशिष्ट रूप से लक्षित है और नस्लीय भेदभाव को प्रशासनिक अक्षमता की बात कहकर ढंका नहीं जा सकता है।

प्रतिबंध नौकरशाही की असुविधा से आगे की बात कहते हैं। अधिकारी नियमित रूप से तिब्बती नागरिकों के मौजूदा पासपोर्ट जब्त कर लेते हैं, जिससे वे प्रभावी रूप से चीन की सीमाओं के भीतर फंस जाते हैं। ये उपाय उन क्षेत्रों में सबसे अधिक कठोर हैं, जहां राजनीतिक प्रतिरोध देखा गया है। विशेष रूप से सिचुआन प्रांत के न्गाबा (चीनी: अबा) में। यह क्षेत्र आत्मदाह करने वाले प्रदर्शनकारियों का केंद्र है।

२०२३ की शुरुआत से अधिकारियों ने अत्यधिक प्रतिबंधात्मक शर्तों के तहत तिब्बतियों द्वारा सीमित पासपोर्ट आवेदनों की अनुमति दी है, लेकिन ये अपवाद इस नियम को ही पुष्ट करते हैं। यात्रा की मंजूरी केवल गैर-राजनीतिक उद्देश्यों के लिए दी जाती है। इसके लिए कई एजेंसियों द्वारा व्यापक जांच की जाती है और वापसी और राजनीतिक अनुपालन के लिखित आश्वासन लिया जाता है।

विभिन्न नस्लीय समूहों के साथ किए जाने वाले सरकारी व्यवहार की तुलना करने पर भेदभाव स्पष्ट हो जाता है। एक ही क्षेत्र के हान मूल के नागरिकों को पासपोर्ट संबंधी बहुत कम जरूरतें पूरी करनी पड़ती है। उन्हें किसी जमानतदार की आवश्यकता नहीं होती, किसी विस्तृत समीक्षा से नहीं गुजरना पड़ता है और किसी सामूहिक दंड का सामना नहीं करना पड़ता है। यह भेदभाव बताता है कि प्रतिबंध भूगोल या सुरक्षा के बारे में नहीं हैं, बल्कि नस्लीय और राजनीतिक नियंत्रण के बारे में हैं। आगे पढने के लिए यहाँ क्लीक करें ।


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