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भारत, चीन बैठकर सीमा समस्या का समाधान ढूढें: दलाईलामा

January 14, 2013

पंजाब केसरी, 13 जनवरी 2013

वाराणसी:आध्यात्मिकगुरु दलाईलामा ने भारत एवं चीन को सलाह दी है कि वे एक साथ बैठकर सीमा समस्या का समाधान ढूढें। केन्द्रीय तिब्बती अध्ययन विश्वविद्यालय में पत्रकारों से बातचीत करते हुए दलाईलामा नें कहा कि दोनो देश सीमा की सुरक्षा के लिए करोड़ों खर्च कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि इस धन का सदुपयोग विकास के कामों पर खर्च किया जाना चाहिए जिससे की लोगों की हालत में सुधार हो। तिब्बत की स्वायत्ता की मांग को दुहराते हुए उन्होंने कहा, हम चीन से आजादी नहीं चाहते, लेकिन चीन जो हमारी संस्कृति एवं परम्परा
को नष्ट कर रहा है, वे खतरनाक हैं। तिब्बत के वातावरण को भी तबाह किया जा रहा है।  हमें अगर पूर्ण स्वायत्तता मिलती है तो हम
अपनी प्राचीन परम्परा एवं संस्कृति को बचाने में सफल होंगे।

दलाई लामा ने कहा कि चीन में भी बड़ी तेजी से परिवर्तन हो रहा है, वहां की युवा पीढी हमारी बातों को स्वीकार करने लगे हैं। उन्होंने कहा कि जिस चीन में लोग राजनीतिज्ञों के खिलाफ बोलते नहीं थे, अब आवाज उठाने लगे हैं। तिब्बत के पक्ष में करीब एक हजार लेख भी प्रकाशित हो चुके हैं। भारत की धर्म निरपेक्षता एवं प्रजातंत्र की सराहना करते हुए दलाई लामा ने कहा कि यहां हर धर्म के लोगों शांतिपूर्व एवं भाई चारे से रह रहे हैं।

उन्होंने कहा कि म्यांमार भी एक बौद्ध धर्म को मानने वाला देश है लेकिन आज भी प्रजातंत्र के लिए परेशान है। दलाई लामा ने कहा कि चीन के तिब्बत पर अधिकार के बाद हम शरणार्थी हो गये लेकिन भारत से हमारा भरपूर सहयोग दिया। उन्होंने कहा कि हमने सारा ज्ञान भारत से प्राप्त किया एवं भारत हमारा गुरु है। पूरी दुनिया में आ रही नैतिक मूल्यों की गिरावट पर दलाई लामा ने कहा कि भारत भी इससे नहीं बच पाया है। इससे पूर्व बौद्ध धर्म एव ंसमाज पर व्याख्यान देते हुए दलाई लामा ने कहा कि दुख का कारण अर्थ है।

उन्होंने कहा कि समाज में बढ़ रही समस्याओं का मुख्य कारण है कि लोग अपने धर्म का सही पालन नहीं कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि नकारात्मक सोच हावी हो रही है। उन्होंने कहा कि लोगों को धर्म का गहराई से अध्ययन करना होगा। शिक्षा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि शिक्षा से ही सभी समस्याओं का निराकरण हो सकता है।

उन्होंने अपने अनुयाइयों को सलाह दी कि उन्हें 21वीं सदी का बौद्ध होना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि बौद्ध धर्म मानवता का पाठ पढ़ाता है। उन्होंने कहा कि बौद्ध धर्म हमेशा सत्य, अङ्क्षहसा, शांति एवं भाई चारे का पाठ पढ़ाता रहा है। उन्होंने कहा कि आज बड़ी संख्या में विज्ञान एवं वैज्ञानिक बौद्ध धर्म से प्रभावित हो रहे हैं क्योंकि दुनिया में इसी धर्म का पालन करने से शांति एवं सद्भाव आ सकता है।

उन्होंने कहा कि बौद्ध धर्म दुनिया का एक ऐसा धर्म है जो सभी प्राणियों के कल्याण की बात करता है।


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