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वरदान अथवा चमत्कार से कुछ प्राप्त नहीं होता । दलाई लामा

January 16, 2011

केन्द्रीय तिब्बती अध्ययन विश्वविधालय के प्रांगण में व्याख्यमाला के चौथे दिन शनिवार को परम पावन दलाई लामा ने तंत्रयान, बोधिचित के महत्व पर प्रकाश डालने के साथ ही बोधिचर्यावतार के संदर्भ में श्रद्धालुओं को विस्तार से जानकारी दी । पाम पावन ने कहा कि तंत्रयान का उद्देश्य यश , दीर्घायु, धन दौलत प्राप्त करना नही है, बल्कि स्वार्थ से परे होकर परमार्थ में लग जाना है । उन्होंने कहाकि तंत्रयानी की भी भौतिकवाद के चकर में नही पडता है । तंत्रयान तुत्छ प्रयोजन के लिए भी नहीं होता । यहां तक की उसका उदेश्य निर्वाण प्राप्त करना नही है । उसका मूल लक्ष्य लोककल्यण है । तंत्रयान वह चंदन वृक्ष है , जो लोगों को शांति रुपी शीतलता प्रदान करने के साथ ही लोक कल्याण के लिए प्ररिता करता है । बौधिचित के महत्व पर प्रकाश डालते हुए परम पावन ने कहा कि बोधिचित की मुख्य शिक्षा स्वार्थ से परार्थ की ओर अग्रसर होते रहना एंव किसी भी प्राणी को नुकसान न पहुंचाना है । उन्होंने कहा कि बुद्धत्व से बडा कोई चीज नही है। परम पावन ने कहाकि इस संवार में कोई मनुष्य वरदान अथवा चमात्कार से कुछ नहीं कर सकता है । यदि उसे कुछ प्राप्त करना है तो उसे अथक परिश्रम करना होगा। उन्होंने समझाया जितने भी बोधिचित्त और बुद्ध हुए वे अपनी साधना और कर्मठता से हुए । वरदान अथवा चम्तकार से नहीं । उन्होंने अत्त दीपोमय कहकर लोगों को स्वव विवेक से कार्य करने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि विश्वशांति प्रार्थना एंव वरदान से नहीं मिल सकती । इसके लिए तो हमें प्रयत और परिश्रम करन होगा । परम पावन गुरु की हैसियत से श्रद्धालुओं को उपासक और उपासिका की दीक्षा भी दी। प्रतिज्ञा करायी कि मै लोकहित के लिए त्रिशरण बुद्ध धर्म एंव संघ का गमन करता हूं। अपने पूर्व में किये गयें पापों के लिए प्रायश्र्ति करता हूं। जब तक बोधिमणडम में नहीं पहुंचता अर्थात बुद्धत्व को नहीं प्राप्त कर लेता तब तक त्रिशरण में जाता रहूंगा। निरंतर दूसरों के दुख दूर करने का प्रयास करता रहूंगा। मेरे सारे कार्य लोककल्यण के लिए समर्पित हो।


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