भाषा
བོད་ཡིག中文English
  • मुख पृष्ठ
  • समाचार
    • वर्तमान तिब्बत
    • तिब्बत समर्थक
    • लेख व विचार
    • कला-संस्कृति
    • विविधा
  • हमारे बारे में
  • तिब्बत एक तथ्य
    • तिब्बत:संक्षिप्त इतिहास
    • तिब्बतःएक अवलोकन
    • तिब्बती राष्ट्रीय ध्वज
    • तिब्बती राष्ट्र गान (हिन्दी)
    • तिब्बत स्वायत्तशासी क्षेत्र
    • तिब्बत पर चीनी कब्जा : अवलोकन
    • निर्वासन में तिब्बती समुदाय
  • केंद्रीय तिब्बती प्रशासन
    • संविधान
    • नेतृत्व
    • न्यायपालिका
    • विधायिका
    • कार्यपालिका
    • चुनाव आयोग
    • लोक सेवा आयोग
    • महालेखा परीक्षक
    • १७ केंद्रीय तिब्बती प्रशासन आधिकारिक छुट्टियां
    • CTA वर्चुअल टूर
  • विभाग
    • धर्म एवं सांस्कृति विभाग
    • गृह विभाग
    • वित्त विभाग
    • शिक्षा विभाग
    • सुरक्षा विभाग
    • सूचना एवं अंतर्राष्ट्रीय संबंध विभाग
    • स्वास्थ विभाग
  • महत्वपूर्ण मुद्दे
    • तिब्बत जो मुद्दे सामना कर रहा
    • चीन-तिब्बत संवाद
    • मध्य मार्ग दृष्टिकोण
  • वक्तव्य
    • परम पावन दलाई लामा द्वारा
    • कशाग द्वारा
    • निर्वासित संसद द्वारा
    • अन्य
  • मीडिया
    • तस्वीरें
    • विडियो
    • प्रकाशन
    • पत्रिका
    • न्यूज़लेटर
  • तिब्बत समर्थक समूह
    • कोर ग्रुप फॉर तिब्बतन कॉज़ – इंडिया
    • भारत तिब्बत मैत्री संघ
    • भारत तिब्बत सहयोग मंच
    • हिमालयन कमेटी फॉर एक्शन ऑन तिबेट
    • युथ लिब्रेशन फ्रंट फ़ॉर तिबेट
    • हिमालय परिवार
    • नेशनल कैंपेन फॉर फ्री तिबेट सपोर्ट
    • समता सैनिक दल
    • इंडिया तिबेट फ्रेंडशिप एसोसिएशन
    • फ्रेंड्स ऑफ़ तिबेट
    • अंतरष्ट्रिया भारत तिब्बत सहयोग समिति
    • अन्य
  • संपर्क
  • सहयोग
    • अपील
    • ब्लू बुक

चीन देता है आर्थिक ताकत की धौंस

November 30, 2010

[मंगलवार, 30 नवम्बर, 2010 | स्रोत : आर्यावर्त]

Posted by Kusum Thakur Saturday, November 27, 2010 चीन अपनी आर्थिक हैसियत का इस्तेमाल अपने राजनैतिक फायदे के लिए कर रहा है। अमेरिका के बाद दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था चीन उन देशों के साथ व्यापार कम कर देता है जो देश तिब्बत के धर्मगुरु दलाई लामा का स्वागत करते हैं। इस संबंध में की गई स्टडी के मुताबिक दुनिया के वे देश जो दलाई लामा की मेजबानी करते हैं उनपर चीन अपनी आर्थिक ताकत की धौंस जमाता है। ऐसे देशों द्वारा चीन के लिए होने वाले निर्यात पर ८.१ % से १६.९ % तक का असर पड़ता है। इस स्टडी को आधार मानकर ८ फीसदी के हिसाब से असर का आकलन करने पर भारत को ही करीब ४२ अरब रुपये का घाटा होने का आंकड़ा सामने आता है। भारत द्वारा चीन को करीब ३ खरब ३७ अरब रुपये का निर्यात किया जाता है। शोधकर्ताओं एंड्रियस फच्स और निल्स हेंड्रिक क्लैन के मुताबिक अगर किसी देश का राजनीतिक नेतृत्व दलाई लामा का स्वागत करता है तो चीन उस देश द्वारा किए जाने वाले निर्यात में कटौती करता है। कटौती का दायरा दलाई लामा का स्वागत करने वाले नेता के कद पर निर्भर करता है। अगर देश की आर्थिक हैसियत अच्छी है तो उसका असर ज़्यादा होगा और अगर देश कमजोर है तो असर कम होगा। शोधकर्ताओं के मुताबिक दलाई लामा का स्वागत करने वाले देशों को चीन की आर्थिक मार करीब दो साल झेलनी पड़ती है। गोटिनजन यूनिवर्सिटी में शोधकर्ताओं एंड्रियस फच्स और निल्स हेंड्रिक क्लैन ने चीन के साथ दुनिया के १५९ देशों के व्यापार संबंधों पर शोध कर यह निष्कर्ष निकाला है। गौरतलब है कि तिब्बत की आज़ादी के लिए दलाई लामा लंबे समय से संघर्ष कर रहे हैं। वे भारत में राजनैतिक शरण लिए हुए हैं। तिब्बत पर चीन का नियंत्रण है। स्टडी के मुताबिक तिब्बती धर्म गुरु दलाई लामा का स्वागत करने में एशियाई देश कतराते हैं। गोटिनजन यूनिवर्सिटी में शोधकर्ताओं एंड्रियस फच्स और निल्स हेंड्रिक क्लैन के मुताबिक चीन से नजदीक और सीमाएं साझा करने वाले देश चीन के साथ किसी भी तरह का विवाद नहीं चाहते हैं। उनके मुताबिक यही वजह है कि ज़्यादातर एशियाई देश दलाई लामा को अपने यहां आमंत्रित नहीं करते हैं। दूसरे देशों के निर्यात घटाने से चीन द्वारा किए जाने वाले निर्यात पर भी असर पड़ता है। जानकार मानते हैं कि चीन की अंदरूनी राजनीति पर ऐसे फैसलों का सकारात्मक असर पड़ता है। यही वजह है कि चीन अपना नुकसान होने के बावजूद इसी नीति पर अमल करता है।


विशेष पोस्ट

बुद्ध पूर्णिमा (वेसाक) के अवसर पर परम पावन दलाई लामा का संदेश

1 May at 9:42 am

संदेश

31 Mar at 9:22 am

परम पावन दलाई लामा के दीर्घायु के लिए तीन तिब्बती समूहों द्वारा प्रार्थनाएं अर्पित

25 Mar at 10:05 am

परम पावन दलाई लामा ने भारत में तिब्बत मुद्दे का समर्थन करने वाले कोर ग्रुप द्वारा आयोजित दीर्घायु प्रार्थनाओं में भाग लिया

11 Mar at 9:07 am

परम पावन १४वें दलाई लामा के तिब्बत के लौकिक और आध्यात्मिक नेतृत्व संभालने की ७५वीं सालगिरह के मौके पर निर्वासित तिब्बती संसद का बयान

10 Mar at 9:41 am

संबंधित पोस्ट

बुद्ध पूर्णिमा (वेसाक) के अवसर पर परम पावन दलाई लामा का संदेश

1 week ago

संदेश

1 month ago

परम पावन दलाई लामा के दीर्घायु के लिए तीन तिब्बती समूहों द्वारा प्रार्थनाएं अर्पित

1 month ago

परम पावन दलाई लामा ने भारत में तिब्बत मुद्दे का समर्थन करने वाले कोर ग्रुप द्वारा आयोजित दीर्घायु प्रार्थनाओं में भाग लिया

2 months ago

परम पावन १४वें दलाई लामा के तिब्बत के लौकिक और आध्यात्मिक नेतृत्व संभालने की ७५वीं सालगिरह के मौके पर निर्वासित तिब्बती संसद का बयान

2 months ago

हमारे बारे में

महत्वपूर्ण मुद्दे
तिब्बत जो मुद्दे सामना कर रहा
मध्य मार्ग दृष्टिकोण
चीन-तिब्बत संवाद

सहयोग
अपील
ब्लू बुक

CTA वर्चुअल टूर

तिब्बत:एक तथ्य
तिब्बत:संक्षिप्त इतिहास
तिब्बतःएक अवलोकन
तिब्बती:राष्ट्रीय ध्वज
तिब्बत राष्ट्र गान(हिन्दी)
तिब्बत:स्वायत्तशासी क्षेत्र
तिब्बत पर चीनी कब्जा:अवलोकन
निर्वासन में तिब्बती समुदाय

केंद्रीय तिब्बती प्रशासन
संविधान
नेतृत्व
न्यायपालिका
विधायिका
कार्यपालिका
चुनाव आयोग
लोक सेवा आयोग
महालेखा परीक्षक
१७ केंद्रीय तिब्बती प्रशासन आधिकारिक छुट्टियां

केंद्रीय तिब्बती विभाग
धार्मीक एवं संस्कृति विभाग
गृह विभाग
वित्त विभाग
शिक्षा विभाग
सुरक्षा विभाग
सूचना एवं अंतर्राष्ट्रीय संबंध विभाग
स्वास्थ विभाग

संपर्क
भारत तिब्बत समन्वय केंद्र
एच-10, दूसरी मंजिल
लाजपत नगर – 3
नई दिल्ली – 110024, भारत
दूरभाष: 011 – 29830578, 29840968
ई-मेल: [email protected]

2021 India Tibet Coordination Office • Privacy Policy • Terms of Service