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चीन ने तिब्बती नव वर्ष के मौके पर भिक्षुओं से दलाई लामा को ‘बेनकाब और निंदा’ करने को कहा

February 1, 2024

अधिकारियों ने प्रतिष्ठित बौद्ध भिक्षुओं से ‘मातृभूमि की एकता’ की रक्षा करने का आह्वान किया।

rfa.org / पेलबार और तेनज़िन पेमा

तिब्बती नव वर्ष- लोसार के मौके पर चीनी अधिकारियों ने सिचुआन प्रांत के तिब्बती आबादी वाले हिस्सों में कम से कम ३५ बौद्ध मठों का दौरा किया और प्रतिष्ठित भिक्षुओं को उपहार देकर दलाई लामा की ‘पूरी तरह से बेनकाब करने और निंदा करने’ के अलावा उनसे ‘मातृभूमि की एकता’ की रक्षा करने का आग्रह किया। संयुक्त मोर्चा कार्य विभाग के एक बयान के अनुसार, पल्युल (चीनी : बाययू) काउंटी में कम्युनिस्ट पार्टी कमेटी के सचिव लियू यान के नेतृत्व में अधिकारियों ने ११ जनवरी से १७ जनवरी तक कार्दज़े तिब्बती स्वायत्त प्रि‍फेक्‍चर में मठों का दौरा किया। संयुक्त मोर्चा कार्य विभाग चीनी सरकार के घरेलू और बाहरी मामलों की देख-रेख करता है।

तिब्बती नव वर्ष- लोसर १० फरवरी को है। १० फरवरी को ही चीन का चंद्र नव वर्ष शुरू होता है। इस समय चीन में साल की सबसे लंबी छुट्टी होती है। लियू ने भिक्षुओं को लोसार को शुभकामनाएं दीं और राष्ट्रीय जागरुकता, कानूनी जागरुकता, नागरिक जागरुकता को सचेत रूप से आगे बढ़ाने के साथ ही ‘दलाई लामा और दलाई गुट की विभाजनकारी प्रकृति को पूरी तरह से उजागर करने और उनकी निंदा करने’ की आवश्यकता पर जोर दिया।

बीजिंग का मानना है कि भारत के धर्मशाला में निर्वासन में रह रहे तिब्बती आध्यात्मिक नेता तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र और चीन के सिचुआन और किंघई प्रांतों के तिब्बती आबादी वाले क्षेत्रों को देश से अलग करना चाहते हैं।

हालाकि, असलियत यह है कि‍ दलाई लामा तिब्बत की स्वतंत्रता की वकालत नहीं करते हैं, बल्कि ‘मध्यम मार्ग’ दृष्टिकोण की वकालत करते हैं। इसके तहत तिब्बत को चीन के हिस्से के रूप में स्वीकार किया जाता है और तिब्बत के लिए अधिक सांस्कृतिक और धार्मिक स्वतंत्रता का आग्रह करता है। इस मांग में मजबूत भाषा अधिकार भी शामिल हैं जिसकी गारंटी चीन के संविधान में भी जातीय अल्पसंख्यकों के लिए दी गई है।

अधिकारियों ने क्षेत्र के पल्युल मठ, याचेन गार मठ और काटोग मठ समेत प्रसिद्ध मठों का दौरा किया। ये सभी मठ बौद्ध धर्म के वज्रयान  निंगमा संप्रदाय से जुड़े हैं। लियू ने २२ जनवरी को चेंगदू में विभिन्न संप्रदायों के प्रतिनिधियों के साथ अलग से बैठक का भी नेतृत्व किया, जहां उन्होंने आदेश दिया कि तिब्बती बौद्ध नेता यह सुनिश्चित करें कि मठवासी समूह और उनके अनुयायी ‘मातृभूमि की एकता और राष्ट्रीय एकता की दृढ़ता से रक्षा करें।‘उन्होंने उनसे ‘पांच पहचान’ को बढ़ावा देने का आग्रह किया, जिसे राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने बार-बार कहा है कि यह सभी चीनी नागरिकों और अल्पसंख्यक समूहों के लिए आवश्यक है। इनमें मातृभूमि, चीनी राष्ट्र, चीनी संस्कृति, चीनी कम्युनिस्ट पार्टी और चीनी विशेषताओं वाले समाजवाद की पहचान शामिल है।

‘धोखे की टट्टी’

तिब्बत की स्थितियों पर नजर रखने वाले विशेषज्ञों ने चीन के इस कदम की आलोचना करते हुए इसे कपटपूर्ण करार दिया। उन्‍होंने इस कदम को पल्युल में तिब्बती मठवासी समुदाय पर चीनी कम्युनिस्ट पार्टी की लाइन पर चलने का दबाव बनाने की एक चाल बताया। धर्मशाला स्थित केंद्रीय तिब्बती प्रशासन (सीटीए) के आधिकारिक थिंक टैंक- तिब्बत नीति संस्थान- के निदेशक दावा छेरिंग ने कहा, ‘महत्वपूर्ण अवसरों और छुट्टियों पर तिब्बती भिक्षुओं और भिक्षुणियों को शुभकामनाएं और नकद उपहार देने की चीनी सरकार की प्रथा वास्तव में ‘धोखे की ट़ट्टी’ है।

उन्होंने रेडियो फ्री एशिया को बताया, ‘चीनी अधिकारी जिस तरह का व्‍यवहार कर रहे हैं और शुभकामनाएं दे रहे हैं, उसे किसी भी तरह से ईमानदार शुभकामना नहीं कहा जा सकता है। चीनी सरकार आम तौर पर तिब्बतियों को इस तरह का उपहार देती है और इसके एवज में लोगों पर दलाई लामा की निंदा करने और कम्‍युनिस्‍ट पार्टी के प्रति निष्ठा रखने के लिए दबाव डालने का काम करती है।‘लंदन स्थित तिब्बत वॉच के एक शोधकर्ता पेमा ग्याल ने आरएफए को बताया कि चीनी सरकार महत्वपूर्ण अवसरों और समारोहों पर की जानेवाली इस तरह की यात्राओं का उपयोग ‘आम जनता में अपना प्रचार करने और अपनी दमनकारी नीतियों के बारे में जागरुकता पैदा करने के बहाने के रूप में करती है।‘चीनी अधिकारियों ने पल्युल काउंटी में नए साल के संदेश के तौर पर तिब्बती प्रधान बौद्ध भिक्षुओं को ‘पार्टी के धार्मिक कार्य सिद्धांतों और नीतियों का गहराई से व्यवस्थित अध्ययन और राजनीतिक शिक्षा ग्रहण करने’ का भी आदेश दिया।

लियू ने कहा, इन संदेशों में तिब्बती बौद्ध धर्म के चीनीकरण के लिए शी के निर्देशों का पालन करने के महत्व के बारे में जागरुकता फैलाना भी  शामिल है, जो धार्मिक सिद्धांतों, शिक्षाओं और रीति‍- रिवाजों की व्याख्या करते समय समाजवादी मूल्यों को ध्‍यान में रखने को अनिवार्य बनाता है।

जनवरी २०२१ में धार्मिक मामलों के प्रशासन (स्‍टेट एडमिनिस्‍ट्रेशन ऑफ रिलिजियस अफेयर) द्वारा पारित किए गए धार्मिक पादरी विनियमन (एडमिनिस्‍ट्रेटिव मेजर्स फॉर रिलिजियस क्‍लेर्जी रेगुलेशन) के तहत यह अनिवार्य किया गया है कि कम्युनिस्ट पार्टी के प्रशासनिक उपायों के तहत धार्मिक पुजारियों को ‘धर्मों के चीनीकरण’ या ‘धर्मों को चीन के समाजवादी समाज के अनुकूल करने’ के लिए शी की योजनाओं का समर्थन करना चाहिए और देश के राष्ट्रीय हित एवं विचारधारा के अनुरूप इसमें काम करना चाहिए।


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