भाषा
བོད་ཡིག中文English
  • मुख पृष्ठ
  • समाचार
    • वर्तमान तिब्बत
    • तिब्बत समर्थक
    • लेख व विचार
    • कला-संस्कृति
    • विविधा
  • हमारे बारे में
  • तिब्बत एक तथ्य
    • तिब्बत:संक्षिप्त इतिहास
    • तिब्बतःएक अवलोकन
    • तिब्बती राष्ट्रीय ध्वज
    • तिब्बती राष्ट्र गान (हिन्दी)
    • तिब्बत स्वायत्तशासी क्षेत्र
    • तिब्बत पर चीनी कब्जा : अवलोकन
    • निर्वासन में तिब्बती समुदाय
  • केंद्रीय तिब्बती प्रशासन
    • संविधान
    • नेतृत्व
    • न्यायपालिका
    • विधायिका
    • कार्यपालिका
    • चुनाव आयोग
    • लोक सेवा आयोग
    • महालेखा परीक्षक
    • १७ केंद्रीय तिब्बती प्रशासन आधिकारिक छुट्टियां
    • CTA वर्चुअल टूर
  • विभाग
    • धर्म एवं सांस्कृति विभाग
    • गृह विभाग
    • वित्त विभाग
    • शिक्षा विभाग
    • सुरक्षा विभाग
    • सूचना एवं अंतर्राष्ट्रीय संबंध विभाग
    • स्वास्थ विभाग
  • महत्वपूर्ण मुद्दे
    • तिब्बत जो मुद्दे सामना कर रहा
    • चीन-तिब्बत संवाद
    • मध्य मार्ग दृष्टिकोण
  • वक्तव्य
    • परम पावन दलाई लामा द्वारा
    • कशाग द्वारा
    • निर्वासित संसद द्वारा
    • अन्य
  • मीडिया
    • तस्वीरें
    • विडियो
    • प्रकाशन
    • पत्रिका
    • न्यूज़लेटर
  • तिब्बत समर्थक समूह
    • कोर ग्रुप फॉर तिब्बतन कॉज़ – इंडिया
    • भारत तिब्बत मैत्री संघ
    • भारत तिब्बत सहयोग मंच
    • हिमालयन कमेटी फॉर एक्शन ऑन तिबेट
    • युथ लिब्रेशन फ्रंट फ़ॉर तिबेट
    • हिमालय परिवार
    • नेशनल कैंपेन फॉर फ्री तिबेट सपोर्ट
    • समता सैनिक दल
    • इंडिया तिबेट फ्रेंडशिप एसोसिएशन
    • फ्रेंड्स ऑफ़ तिबेट
    • अंतरष्ट्रिया भारत तिब्बत सहयोग समिति
    • अन्य
  • संपर्क
  • सहयोग
    • अपील
    • ब्लू बुक

शून्य आत्मसात करने से बोधिसत्व की प्राप्ति

January 16, 2011

वाराणसी। प्रज्ञा में समस्त पदार्थ एक-दूसरे के सापेक्ष हैं और उनकी वास्तविकता शून्य। इस शून्य को आत्मसात करने के बाद चार काय से युक्त बोधिसत्व की प्राप्ति होती है। यह संदेश दिया परम पावन दलाई लामा ने। बौद्ध धर्मगुरु केंद्रीय तिब्बती अध्ययन विश्वविद्यालय के कालचक्र मैदान में बोधिचर्चावतार व भावनाक्रम ग्रंथों पर आयोजित व्याख्यान माला को पांचवे व अंतिम दिन संबोधित कर रहे थे। कहा बोधिचर्चावतार महापानी ग्रंथ के अध्ययन और उसके आचरण से समस्त का कल्याण होता है।

परम पावन ने कहा कि बोधिसत्व प्रार्थना करता है कि जब तक आकाश व धरती रहें तब तक मैं जगत का दुख नाश करते हुए संसार में बना रहूं। जगत का जो दुख है उसे मैं भोगूं और बोधिसत्व के सभी पुण्यों से संपूर्ण जगत सुखी रहे।

उन्होंने सुबह सवा आठ बजे आर्य तारा चिंतामणि की दीर्घायु अभिषेक पूजा शुरू कराते हुए प्रवचन स्थल की सीमाओं को मंत्रों से बांधकर शुद्ध किया। फिर कहा यदि कोई व्यक्ति गलत आचरण करते हुए लंबी आयु जीता है, तो उसका कोई महत्व नहीं है। यदि कोई व्यक्ति किसी को नुकसान पहुंचाए बिना जीता है, तभी ठीक है। संसार हित के लिए दीर्घायु होना पूजनीय है। दीर्घायु मंत्र जप के लिए मन का शुद्ध होना जरूरी है।

परम पावन ने अनुयायियों को श्वेत तारा के रूप में ध्यान करने का निर्देश दिया और दीर्घायु पूजा कराई। इस दौरान ंउन्हें मूर्ति, ग्रंथ और स्तूप का प्रतीक भेंट किया। दलाई लामा ने कहा कि यह पूजा लोक कल्याण के लिए की जाती है। इससे दीर्घायु प्राप्त होती है, जिसका सदुपयोग लोक कल्याण के लिए करना चाहिए। इसका महत्व इसलिए भी है कि इसको करने से बल व पुण्य की वृद्धि होती है। आर्य तारा दीर्घायु अभिषेक पूजा बौद्ध परंपरा की महत्वपूर्ण पूजा है।

बिना वीजा पहुंचे दो हजार तिब्बती

वाराणसी। परमपावन दलाई लामा का संदेश ग्रहण करने की लालसा से बगैर वीजा के दो हजार तिब्बती श्रद्धालु रविवार को सारनाथ पहुंचे। इन श्रद्धालुओं को दोपहर सवा एक बजे दलाईलामा ने संबोधित भी किया। हालांकि इस आयोजन से मीडिया को दूर ही रखा गया था। इस बारे में सुरक्षा प्रभारी ने मजबूरी जताई कि आयोजन की खबर व तस्वीर समाचारपत्रों व टीवी पर प्रसारित होने पर तिब्बत से आए लोगों को चीन सरकार दंडित करेगी। यह दीगर बात है कि दलाई लामा के पांच दिवसीय कार्यक्रम का कवरेज कालचक्र मैदान से चीनी, रुसी, इटैलियन, मंगोलियन, हिंदी व अंग्रेजी में अनुवाद करने के साथ इंटरनेट पर भी जारी किया जा रहा है। बिना वीजा के यहां पहुंचे तिब्बतियों की देश की सीमा पर पड़ताल की गई या नहीं, अब ये लौटेंगे अथवा यहीं रह जाएंगे यह लोगों के बीच चर्चा का विषय बना है।

मोबाइल पर ताजा खबरें, फोटो, वीडियो व लाइव स्कोर देखने के लिए जाएं m.jagran.com पर

ईमेल करें
मैसेंजर के द्वारा भेजें
प्रिंट संस्‍करण
लेख को दर्जा दें

दर्जा दें

0 out of 5 blips

(2) वोट का औसत

average:5
Saving…

विशेष पोस्ट

संदेश

31 Mar at 9:22 am

परम पावन १४वें दलाई लामा के तिब्बत के लौकिक और आध्यात्मिक नेतृत्व संभालने की ७५वीं सालगिरह के मौके पर निर्वासित तिब्बती संसद का बयान

10 Mar at 9:41 am

परम पावन महान १४वें दलाई लामा द्वारा महान राष्ट्र तिब्बत का आध्यात्मिक-आधिभौतिक नेतृत्व संभालने के ७५वीं वर्षगांठ पर कशाग का बयान

10 Mar at 9:36 am

परम पावन दलाई लामा को ग्रैमी अवॉर्ड मिला, जिसमें उन्होंने यूनिवर्सल ज़िम्मेदारी और करुणा को दिखाया

2 Feb at 9:15 am

परम पावन १४वें दलाई लामा के तिब्बत के लौकिक और आध्यात्मिक नेतृत्व संभालने की ७५वीं सालगिरह के मौके पर निर्वासित तिब्बती संसद का बयान

December 10, 2025

संबंधित पोस्ट

संदेश

2 weeks ago

परम पावन १४वें दलाई लामा के तिब्बत के लौकिक और आध्यात्मिक नेतृत्व संभालने की ७५वीं सालगिरह के मौके पर निर्वासित तिब्बती संसद का बयान

1 month ago

परम पावन महान १४वें दलाई लामा द्वारा महान राष्ट्र तिब्बत का आध्यात्मिक-आधिभौतिक नेतृत्व संभालने के ७५वीं वर्षगांठ पर कशाग का बयान

1 month ago

परम पावन दलाई लामा को ग्रैमी अवॉर्ड मिला, जिसमें उन्होंने यूनिवर्सल ज़िम्मेदारी और करुणा को दिखाया

2 months ago

परम पावन १४वें दलाई लामा के तिब्बत के लौकिक और आध्यात्मिक नेतृत्व संभालने की ७५वीं सालगिरह के मौके पर निर्वासित तिब्बती संसद का बयान

4 months ago

हमारे बारे में

महत्वपूर्ण मुद्दे
तिब्बत जो मुद्दे सामना कर रहा
मध्य मार्ग दृष्टिकोण
चीन-तिब्बत संवाद

सहयोग
अपील
ब्लू बुक

CTA वर्चुअल टूर

तिब्बत:एक तथ्य
तिब्बत:संक्षिप्त इतिहास
तिब्बतःएक अवलोकन
तिब्बती:राष्ट्रीय ध्वज
तिब्बत राष्ट्र गान(हिन्दी)
तिब्बत:स्वायत्तशासी क्षेत्र
तिब्बत पर चीनी कब्जा:अवलोकन
निर्वासन में तिब्बती समुदाय

केंद्रीय तिब्बती प्रशासन
संविधान
नेतृत्व
न्यायपालिका
विधायिका
कार्यपालिका
चुनाव आयोग
लोक सेवा आयोग
महालेखा परीक्षक
१७ केंद्रीय तिब्बती प्रशासन आधिकारिक छुट्टियां

केंद्रीय तिब्बती विभाग
धार्मीक एवं संस्कृति विभाग
गृह विभाग
वित्त विभाग
शिक्षा विभाग
सुरक्षा विभाग
सूचना एवं अंतर्राष्ट्रीय संबंध विभाग
स्वास्थ विभाग

संपर्क
भारत तिब्बत समन्वय केंद्र
एच-10, दूसरी मंजिल
लाजपत नगर – 3
नई दिल्ली – 110024, भारत
दूरभाष: 011 – 29830578, 29840968
ई-मेल: [email protected]

2021 India Tibet Coordination Office • Privacy Policy • Terms of Service